25 मार्च को राजस्थान दिवस समारोह की शुरुआत के मौके पर बाड़मेर में हुए मुख्यमंत्री के दौरे पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सवाल उठाया है। दरअसल सोशल मीडिया पर एक सरकारी आदेश वायरल हो रहा है, जिसमें समस्त मानदेयकर्मी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और आशा सहयोगिनियों को मुख्यमंत्री की सभा में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जो कर्मचारी कार्यक्रम में उपस्थित नहीं होंगे, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
आदेश के अनुसार बाड़मेर शहर की सभी 68 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका एवं आशा सहयोगिनी को आदर्श स्टेडियम में समय पर उपस्थित रहना अनिवार्य किया गया था। वहीं शहर से बाहर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को ग्राम विकास अधिकारी के माध्यम से बसों द्वारा लाने की व्यवस्था की गई थी और बस में ही भोजन के पैकेट भी वितरित किए जाने का जिक्र इस मैसेज में है।
इस आदेश के सोशल मीडिया पर सार्वजनिक होते ही विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि भीड़ के लिए सरकारी फरमान, मुख्यमंत्रीजी की सभा या सरकारी हाजिरी? मुख्यमंत्रीजी की सभा में समस्त मानदेय कर्मियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और आशा सहयोगिनी को जबरन बुलाने का आदेश और सभा में न आएं तो अनुशासनात्मक कार्रवाई की धमकी, यह अवैधानिक है।
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उन्होंने कहा कि जनता सब समझती है और फरमान तो प्रदेश की जनता भी आपको दे सकती है। आपने अपने संकल्प पत्र में जो वादे किए थे, आखिर वे पूरे क्यों नहीं कर रहे? अब आप ही बताइए आप पर कौन सी अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए? उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आदेश मुख्यमंत्री पद की गरिमा के खिलाफ हैं।