बारां जिले के निकाय चुनाव में इस बार सियासत का पूरा गणित ही बदल गया। जिस बारां नगर परिषद को लंबे समय से भाजपा और कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता था, वहां पहली बार चुनाव मैदान में उतरी आम आदमी पार्टी ने दोनों बड़े दलों को जोरदार झटका देते हुए स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया। इस जीत के बीच सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व सभापति कमल राठौर और उनकी पत्नी शीतल राठौर की जोड़ी की हो रही है। अब 60 में से 31 सीटें जीतने के बाद शीतल राठौर सभापति पद की दौड़ में सबसे आगे हैं।
राजनीति में सक्रिय नहीं थीं शीतल, इस चुनाव में संभाली कमान
बारां नगर परिषद में कुल 60 वार्ड हैं। आप ने 31 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया, जबकि कांग्रेस को 18 और भाजपा को महज 9 सीटें मिलीं। भाजपा पिछली बार 21 सीटें जीती थी। वहीं कांग्रेस लगातार तीन बार बोर्ड बनाने के बाद इस बार 18 सीटों पर सिमट गई।
इस पूरे चुनाव में शीतल राठौर की भूमिका खास रही। वह इससे पहले सक्रिय राजनीति में ज्यादा नजर नहीं आई थीं, लेकिन इस बार पति कमल राठौर के साथ कदम से कदम मिलाकर चुनाव प्रचार में जुटीं। दोनों ने शहर के सभी 60 वार्डों में आप प्रत्याशियों के समर्थन में प्रचार की जिम्मेदारी संभाली।
पति पहले सभापति रहे, अब पत्नी की बारी
कमल राठौर की राजनीतिक यात्रा भी इस जीत की कहानी का अहम हिस्सा है। उन्होंने पहले भाजपा से पार्षद का चुनाव लड़ा, बाद में कांग्रेस में शामिल हुए और बारां नगर परिषद के सभापति बने। उनके कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में जेल जाने की बात भी सामने आई। इसके बाद दोनों प्रमुख दलों से राजनीतिक दूरी बनने पर उन्होंने आप का दामन थामा।
कमल राठौर ने आप के लिए सभी 60 वार्डों में प्रत्याशी उतारने की रणनीति बनाई। नतीजों ने इस रणनीति को कामयाब कर दिया। अब उनकी पत्नी शीतल राठौर के सभापति बनने की संभावना ने इस चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है।
शीतल खुद भी जीतीं, 305 वोट से दर्ज की जीत
शीतल राठौर ने वार्ड 37 से चुनाव लड़ा और 305 वोटों से जीत दर्ज की। वहीं कमल राठौर वार्ड 46 से 252 वोटों से विजयी हुए। यानी पति-पत्नी दोनों अब नगर परिषद में पार्षद हैं और आप के बहुमत वाले बोर्ड का हिस्सा होंगे।
महिला के हाथ में होगी बारां की कमान
बारां में सभापति का पद महिला अनारक्षित है। ऐसे में शीतल राठौर का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। अगर वह सभापति बनती हैं तो बारां नगर परिषद की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होगा। पहली बार चुनाव लड़कर आप को बहुमत दिलाने वाली टीम में अब एक ऐसी महिला का चेहरा सामने है, जिसने सक्रिय राजनीति से दूरी के बावजूद पूरे चुनाव में पति के साथ मोर्चा संभाला।
बारां का यह नतीजा सिर्फ भाजपा-कांग्रेस की हार-जीत नहीं है। यह उस राजनीतिक जोड़ी की कहानी भी है, जिसमें पति ने रणनीति तैयार की और पत्नी ने मैदान में उतरकर उसे जनता तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। अब सबकी नजर 21 सितंबर को होने वाले सभापति चुनाव पर है।