राजस्थान के बांसवाड़ा में नगर परिषद की एक टेंडर प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। मामला बीपीएल परिवारों के लिए प्लास्टिक डस्टबिन खरीदने से जुड़ा है। करीब 18 लाख रुपये की लागत वाले इस टेंडर में एक डस्टबिन की कीमत 745 रुपये दिए जाने पर सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्षी पार्षद और स्थानीय फर्मों ने प्रक्रिया में अनियमितताओं की आशंका जताते हुए जांच की मांग की है।
बीपीएल परिवारों को बांटे जाने हैं चार रंगों के डस्टबिन
नगर परिषद की ओर से 11 लीटर और 7 लीटर क्षमता वाले प्लास्टिक डस्टबिन खरीदने के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए थे। इनमें हरे, नीले, लाल और काले रंग के डस्टबिन शामिल हैं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत इन्हें शहर के बीपीएल परिवारों में वितरित किया जाना है, ताकि लोग अलग-अलग प्रकार के कचरे को अलग-अलग डस्टबिन में डालने के प्रति जागरूक हो सकें।
कांग्रेस पार्षद ने जिला प्रशासन से मांगी जांच
कांग्रेस पार्षद आशीष मेहता ने टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि करीब 18 लाख रुपये के इस टेंडर में बाजार दर से काफी अधिक कीमत पर जिले से बाहर की एक फर्म को कार्यादेश देने की कवायद की जा रही है। मेहता ने इसे जनता के पैसे के दुरुपयोग की आशंका से जुड़ा मामला बताते हुए पूरी प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है।
स्थानीय फर्मों ने भी उठाए टेंडर प्रक्रिया पर सवाल
टेंडर को लेकर स्थानीय फर्मों के संवेदकों ने भी आयुक्त की भूमिका पर संदेह जताया है। उनका कहना है कि टेंडर में छह फर्मों ने अपनी दरें प्रस्तुत की थीं, लेकिन कथित तौर पर एक पुरानी परिचित फर्म को कार्यादेश देने की मंशा से स्थानीय फर्मों को दरकिनार किया गया।
स्थानीय संवेदकों के अनुसार, चयनित किए जाने की चर्चा वाली फर्म ने एक डस्टबिन की कीमत 745 रुपये बताई है। इसी दर को आधार बनाकर खरीद प्रक्रिया में वित्तीय अनियमितता की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अभी किसी फर्म को नहीं दिया वर्क ऑर्डर
नगर परिषद सभापति मुकेश रावत ने आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि अभी तक किसी भी फर्म को वर्क ऑर्डर जारी नहीं किया गया है। नगर परिषद ने नियमानुसार टेंडर प्रक्रिया अपनाई है। जो दर उचित लगेगी, उसी के आधार पर संबंधित फर्म को कार्यादेश दिया जाएगा।