कुमावत ने बताया कि आमतौर पर लोकप्रिय नेताओं को चुनाव के समय जनता के बीच जाने के दौरान अपनी सुरक्षा के लिए निजी सुरक्षा एजेंसियों की सेवाओं की आवश्यकता होती है। उनकी कंपनी महिला बाउंसर और महिला सुरक्षा गार्ड भी उपलब्ध करवाती है।
इस क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि आचार संहिता लगने के बाद आमतौर पर निजी सुरक्षा एजेंसी में कार्यरत सुरक्षाकर्मियों के लाइसेंस शुदा हथियारों को जमा करवाना पडता है। निजी सुरक्षा कंपनियों के कर्मचारी पुलिस आयुक्त और चुनाव आयोग की अनुमति से लाइसेंसशुदा हथियार रख सकते हैं। इसके लिए बाकायदा प्रार्थना पत्र देकर जरूरी अनुमति लेने के बाद ही नेताओं को हथियार बंद सुरक्षा कर्मी उपलब्ध करवाए जाते हैं।
कुमावत के अनुसार सुरक्षा की चिंता के साथ साथ कुछ नेता जनता के बीच रूतबा दिखाने के लिए भी बाउंसर या बड़ी गन रखने वाले सुरक्षाकर्मियों की मांग करते हैं। जहां तक सुरक्षाकर्मियों को मेहनताने का सवाल है तो बाउंसर्स के लिए एक हजार रुपये से डेढ़ हजार रुपये प्रतिदिन और गनमैन के लिये डेढ़ हजार से ढाई हजार रुपये प्रतिदिन तक चुकाने होते हैं। लाइसेंस शुदा हथियारबंद सुरक्षा कर्मी 15000 से 25000 रुपये प्रतिमाह में उपलब्ध कराए जाते हैं।