नाबालिग के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में जोधपुर जेल में बंद आसाराम प्रकरण की सहयोगी शिल्पी को राजस्थान हाईकोर्ट से शनिवार को बड़ी राहत मिली। हाईकोर्ट ने शिल्पी की सजा स्थगन (निलंबन) के आदेश दिए। अब शिल्पी जोधपुर केंद्रीय कारागार से बाहर आ जाएंगी।
शिल्पी ने एससी/एसटी कोर्ट के 20 साल की सजा के आदेश के खिलाफ सजा स्थगन याचिका पेश की थी, जिस पर हाईकोर्ट में न्यायाधीश विजय विश्नोई ने सुनवाई की। न्यायाधीश विजय विश्नोई की अदालत ने फैसला सुनाते हुए शिल्पी की सजा को निलंबित कर दिया। पिछली सुनवाइयों में शिल्पी के वकील महेश बोड़ा ने एफआईआर दर्ज करने के समय, जगह के साथ ही पीड़िता के बयान, उसके माता पिता के बयान को लेकर सवाल खडे़ किए थे।
सरकार की ओर से एएजी शिव कुमार व्यास ने शिल्पी को षड्यंत्र का मुख्य सूत्रधार बताते हुए सजा को बहाल रखने की गुहार लगाई थी। सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने 26 सितंबर को निर्णय सुरक्षित रख लिया था। गौरतलब है कि नाबालिग छात्रा के साथ यौन उत्पीडन के आरोपी आसाराम को एससी एसटी कोर्ट ने 25 अप्रैल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। साथ ही षड्यंत्र की मुख्य सूत्रधार मानते हुए सहयोगी शिल्पी को 20 साल की सजा के आदेश दिए थे। मामले में शिवा ओर प्रकाश को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था।
आसाराम ने जेल से कहा था, शिल्पी को बाहर निकालूंगा
कुछ सप्ताह पहले आसाराम ने जोधपुर जेल से ऑडियो वायरल किया था। जिसमें कहा था कि पहले शिल्पी को बाहर निकालूंगा। इसके बाद शरद को और फिर मैं बाहर आऊंगा।