राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के अचनारा गांव के 32 वर्षीय अंकित जैन ने चार्टर्ड अकाउंटेंसी का करियर छोड़कर वैराग्य का मार्ग चुना है। दिल्ली के लाल किला मैदान में आयोजित धार्मिक समारोह में उन्होंने दिगंबर मुनि दीक्षा ग्रहण की।
प्रतापगढ़ जिले में स्थित अरनोद उपखंड के अचनारा गांव के रहने वाले अंकित जैन ने चार्टर्ड अकाउंटेंसी छोड़कर वैराग्य पथ पर चलने का निश्चय किया है। दिल्ली के लाल किला मैदान में आयोजित भव्य धार्मिक समारोह में 32 वर्षीय अंकित जैन ने दिगंबर मुनि दीक्षा ग्रहण की।
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चार्टर्ड अकाउंटेंट की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपनी नौकरी के पहले ही दिन सांसारिक जीवन त्यागकर संयम का मार्ग चुना। दीक्षा संस्कार पूर्ण होने के पश्चात अब वे मुनि 105 अभिनय सागर महाराज के नाम से जाने जाएंगे। समारोह में तीन आचार्यों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनकी देखरेख में सभी धार्मिक अनुष्ठान हुए।
नौकरी के पहले दिन जागा वैराग्य
राजस्थान में प्रतापगढ़ जिले में अचनारा गांव के रहने वाले अंकित जैन ने सीए की शिक्षा पूरी की थी। अपनी पढ़ाई के बाद वे जैसे ही अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत करने के लिए नौकरी के पहले दिन पहुंचे, उसी समय उनके मन में वैराग्य की भावना प्रबल हो उठी।
उन्होंने आत्म-कल्याण और साधना के पथ को सर्वोपरि मानते हुए तुरंत सांसारिक मोह-माया को छोड़ने का दृढ़ संकल्प लिया। इस संकल्प के बाद अंकित ने पिछले तीन वर्ष तक आचार्य विशुद्ध सागर महाराज के सानिध्य में रहकर जैन दर्शन और धार्मिक शास्त्रों का गहन अध्ययन किया।
छह साधकों ने ग्रहण की दीक्षा
समारोह में अंकित जैन के साथ कुल छह साधकों ने वैराग्य के पथ पर अपने कदम आगे बढ़ाए। कार्यक्रम में चार बाल ब्रह्मचारियों ने मुनि दीक्षा प्राप्त की, जबकि एक ब्रह्मचारी ने ऐलक दीक्षा अंगीकार की। महज 32 वर्ष की आयु में सीए जैसी प्रतिष्ठित उपाधि अर्जित करने के बाद वैराग्य अपनाने का निर्णय क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।