प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जयपुर में पीकेसी-ईआरसीपी परियोजना को हरी झंडी दिखाने के साथ ही अलवर जिले में पानी की समस्या के समाधान की राह भी खुल गई है। प्रधानमंत्री द्वारा पार्वती-काली सिंध-चंबल (पीकेसी-ईआरसीपी) लिंक परियोजना का जयपुर में मंगलवार को ही उद्घाटन किया गया था। इस परियोजना में अलवर शहर सहित पांच विधानसभा क्षेत्रों में ईआरसीपी (पूर्वी नहर परियोजना) के तहत पानी मिलेगा।
अलवर शहर के अलावा जिन विधानसभा क्षेत्रों को ईआरसीपी में पानी मिलेगा, उनमे राजगढ़, थानागाजी, बानसूर और कठूमर शामिल हैं। वहीं, छह विधानसभा क्षेत्र रामगढ़, किशनगढ़ बॉस, मुंडावर, तिजारा, बहरोड़ और नीमराणा को पार्वती-काली सिंध-चंबल (पीकेसी) से पानी मिलेगा।ईआरसीपी के तहत ईसरदा बांध से करौली खुर्रा चेनपुरा तक पानी आएगा। यहां से अलवर के बीच 150 किलोमीटर ग्रेवल केनाल तथा पम्पिंग से यह पानी नटनी का बारा तक आएगा। यहां से नहर के जरिए यह पानी जयसमंद, लक्ष्मणगढ़ के घाट पिकअप और धमरेड बांध को भरेगा।
इसके अतिरिक्त दढ़ीकर में एक न्यास बांध भी बनेगा। यह बांध जयसमंद से भी बड़ा होगा। इसी बांध से पाइप लाइनों के जरिए अलवर शहर और आसपास के पांच विधानसभा क्षेत्रों में पानी पहुंचेगा। अभी फिलहाल जयसमंद बांध की भराव क्षमता 952 एमसीएफटी और धमरेड बांध की 170 एमसीएफटी है। इस पर अलवर में 6,492 करोड़ रुपये खर्च होंगे और यह काम सिंचाई विभाग करेगा।
उधर, पीकेसी का पानी भरतपुर से होता हुआ अलवर के रामगढ़ से अलवर में प्रवेश करेगा। इसके बाद यह पानी किशनगढ़ बॉस, तिजारा, मुंडावर, बहरोड़ ओर नीमराणा क्षेत्र के लोगों की प्यास बुझाएगा। यह पानी पाइप लाइनों से घरों तक पहुंचेगा। इसकी मॉनिटरिंग पीएचईडी विभाग करेगा।पीकेसी के पानी के लिए 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन और शहरी क्षेत्रों में 135 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन रखा गया है। यह पानी अगले तीन चार साल में मिलने लगेगा।
प्रधानमंत्री द्वारा ईआरसीपी और पीकेसी परियोजना का उद्घाटन करने पर सांसद और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने बयान में कहा कि इससे दशकों पुराने जल संकट का समाधान हो जाएगा। इन तीन बांधों के भरने के साथ ही दढ़िकर में एक कृत्रिम बांध बनेगा। इसके लिए 6,492 करोड़ रुपये की डीपीआर भी तैयार हो गई है। राज्य के वन एंव पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा ने कहा, अलवर की सबसे बड़ी समस्या पानी की ही थी और अब उसके समाधान की राह खुल गई है।
अलवर का जयसमंद बांध