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Alwar Weather: बर्फबारी और सर्द हवाओं के चलते बढ़ा सर्दी का सितम, ठंड से बचने के लिए अलाव जला रहे लोग

Wed, 18 Dec 2024 07:31 PM IST
अलवर ब्यूरो न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर

सार

अलवर में सर्दी का सितम इतना बढ़ गया है कि शाम को बाजारों में वीरानी छाने लगती है और रात तक बाजार खाली दिखाई पड़ते हैं। सर्दी के चलते खांसी और जुकाम से पीड़ित लोग भी अस्पतालों में ज्यादा आ रहे हैं।
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अलवर का मौसम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर भारत के पर्वतीय इलाकों से आ रही सर्द हवाओं के कारण अलवर में हाड़ कंपाने वाली सर्दी पड़ रही है। मंगलवार को न्यूनतम तापमान 3.1 डिग्री दर्ज किया गया। पिछले पांच साल में 17 दिसंबर की रात सबसे सर्द रही। उस दिन रात को न्यूनतम तापमान 2.2 तक पहुंच गया। मंगलवार को अधिकतम तापमान 23 डिग्री रहा और दिन में शहर के तापमान में नौ डिग्री की गिरावट दर्ज की गई।

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बता दें कि दोपहर तीन बजे तापमान 23 डिग्री था, जो शाम को छह बजे लुढ़ककर 14 डिग्री आ गया। बहरोड़ ओर भिवाड़ी का अधिकतम तापमान मंगलवार को बाइस डिग्री और न्यूनतम तापमान पांच डिग्री रहा। मौसम विभाग की माने तो 21 दिसंबर तक जिले में शीतलहर चलने की संभावना है। इसलिए 21 दिसंबर से पहले अलवर के लोगों को सर्दी से राहत मिलने वाली नहीं है।

अलवर में सर्दी का सितम पहले से अधिक बढ़ गया है। रात को खुले इलाकों में बर्फ भी जमने लगी है। सर्द हवाएं चलने से दिन के मुकाबले रात के समय अधिक गलन रहती है। पिछले दो दिन से रात में सर्दी बहुत ज्यादा हो रही है और लोग ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा ले रहे हैं। सर्दी बढ़ने के साथ ही अस्पतालों में खांसी और जुकाम के मरीज भी ज्यादा आ रहे हैं। उत्तर भारत के पर्वतीय इलाकों में हो रही बर्फबारी और लगातार सर्द हवाएं चलने से शहर का न्यूनतम तापमान नीचे जा रहा है और यह दो तीन दिन यही हाल रहने वाला है।
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सर्दी से बचने के लिए आमजन अलाव ताप रहे हैं। शाम होते ही जगह-जगह अलाव जल जाते हैं। सर्दी के चलते हालात यह हो गए हैं कि शाम होते ही बाजार खाली नजर आने लगते हैं। बाजारों में वीरानी दिखाई देती है। शाम सात बजे ही दुकानदार अपनी दुकानें बंद करने लग जाते हैं, ताकि ठंड में जल्दी घर जा सके। उधर, शहर के रैन बसेरों की हालत भी यह हो चुकी है कि रात को वहां जगह नहीं मिलती। क्योंकि ये रैन बसेरे शाम को ही फुल हो जाते हैं। स्थिति यह हो गई है कि लोग जल्दी अपने घरों को लोता जाते हैं, ताकि सर्दी के सितम से सुरक्षित रह सकें।

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