राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आरजीएचएस के अंतर्गत मरीजों के लाइव फोटो और फिंगर प्रिंट की अनिवार्यता की नई व्यवस्था का आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि खामियों से भरा यह आदेश अव्यवहारिक ही नहीं बल्कि अमानवीय भी है। इस नये आदेश से प्रदेश के बुजुर्ग, पेंशनर और असाध्य रोगी परेशान हो रहे हैं। ऐसा लगता है कि सरकार का प्रदेश की जनता के दु:ख-दर्द से कोई सरोकार नहीं है। जूली ने कहा कि आरजीएचएस से जुड़े अस्पतालों में एक दिसंबर से लागू इस नयी व्यवस्था से बुजुर्ग मरीजों की परेशानियां बढ़ी हैं।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि बहुत अफसोस की बात है कि राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर दोनों को ग्राउंड रियल्टी की रत्ती भर भी जानकारी नहीं है। इसलिए राज्य सरकार ने इतना असंगत निर्णय लेकर प्रदेश की जनता की तकलीफ बढ़ाने का काम किया है। इससे ओपीडी से लेकर इनडोर तक सभी जगह मरीजों की परेशानी में इजाफा हुआ है। चार दिन में ही ऐसे मामले सामने आ रहे हैं कि लाइव फोटो का इंप्रेशन पर्ची पर साफ नहीं आ रहा है और इससे मरीजों को पुनः लाइन में लगना पड़ रहा है। इसके अलावा इस नयी व्यवस्था की कोई आवश्यकता नहीं है, लेकिन सरकार ने बिना विचार किये यह व्यवस्था लागू की है।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि राज्य की भाजपा सरकार पिछले एक साल से ऐसे मनमाने फैसले ले रही है। जिनसे आम जनता की परेशानियां निरंतर बढ़ती जा रही हैं। अब आरजीएचएस के अंतर्गत राज्य सरकार ने इलाज के लिए रोगी के फोटो और फिंगर प्रिंट की अनिवार्यता लागू की है। उन्होंने कहा कि इस योजना में रोड़े डालने का कोई अवसर राज्य की भाजपा सरकार नहीं चूकती, क्योंकि यह कांग्रेस शासन में शुरू हुई थी। आरजीएचएस में व्यवधान डालने के लिए सरकार अब यह नया हथकंडा लेकर आयी है।
जूली ने सवाल किया कि आरजीएचएस से जुड़े हुए क्या सभी अस्पतालों में इसकी माकूल व्यवस्था है? उन्होंने कहा कि डायलिसिस कराने के लिए जोधपुर के मरीज की फोटो अप्रूवल के लिए जयपुर
भेजी जा रही है और कई घंटे बाद जयपुर से अप्रूवल मिल पा रहा है। ऐसी खबरें विचलित करने वाली हैं।