रामगढ़ थाना पुलिस ने चार शातिर ठग पकड़े।
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अलवर जिले की रामगढ़ थाना पुलिस ऑन लाइन सट्टा लगाने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी ऑन लाइन लूडो ओर सट्टे की फर्जी वेब साइट पर पैसा लगवा कर ठगी की वारदात को अंजाम देते हैं। इस गैंग के नेटवर्क पर एक ही दिन में 29 लाख रुपये के ज्यादा की ट्रांजेक्शन डिटेल मिली है।
इस गैंग का मास्टर माइंड वसीम महज दूसरी कक्षा तक पढ़ा है लेकिन शातिर इतना है कि रोजाना लाखो रुपये की ठगी करके रकम को जीएसटी फर्मो में डालकर इसे वैध रकम में बदल रहा है। चूंकि सट्टे बाजी अवैध होने से लोग इनकी शिकायत भी नहीं करते। पुलिस के अनुसार वेबसाइटें भी फर्जी थी जिसे चलाने वाले लोगो को पता नहीं चल पाता था। पुलिस द्वारा गैंग के पोर्टल ओर खातों की जांच की जा रही है। पुलिस के अनुसार ठगी की रकम पंद्रह से बीस करोड़ रुपये होने का अनुमान है। गिरफ्तार सभी आरोपी रामगढ़ के पिपरौली गांव के रहने वाले हैं।
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इनमें वसिम पुत्र नवाब मेव, साकिर पुत्र मजीद, खालिद पुत्र खुर्शीद मेव, राजेश पुत्र बनवाए जाटव शामिल है। एक आरोपी साहुन निवासी पिपरौली फरार बताया जा रहा है। इस गवंग से एक क्रेटा, एक स्विफ्ट कार, पांच महंगे मोबाइल, एक स्कैनर, पांच पैन कार्ड, दो स्वीप मशीन, दो पास बुक, 18 एटीएम कार्ड छह चेक बुक और 71 हजार 670 रुपये नकद बरामद किए गए हैं। ये आरोपी वेब साइट पर लूडो या सत्ता खेलने से पहले यूजर का रजिस्ट्रेशन करते। आधार कार्ड और सनलिंक मोबाइल तम्बर पर ओटीपी लेकर सत्यापन करते जिससे लोगों को आसानी से भरोसा हो जाता।
रजिस्टर्ड व्यक्ति को अन्य लोगों को सट्टा लगाने के लिए रेफरल लिंक भेजने ओर जीत की राशि में से 2 प्रतिशत हिस्से का ऑफर देते और इसी चक्कर में फंसकर यूजर नये लोगों को जोड़ते थे। शुरुआत में जीत की छोटी रकम देते, लेकिन जैसे ही कोई बड़ी रकम जीतता तो उसको पैसा नहीं लौटाते। गेम खिलाते वक्त पैसा अलग बैंकों से जुड़ी यूपीआई आईडी में डलवाते थे। ये आईडी किराए पर ली जाती थी। आईडी धारक को कमीशन पेटनर बना देते थे और फि उस पर मोती ठगी करते थे।