रविवार को एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात का 100वां एपिसोड दुनियाभर में सुना गया। वहीं देश में प्रसिद्ध हुए एप गुरु इमरान खान ने भी अपने 100 एप बना लिए हैं, जिसके तीन करोड़ यूजर भी हो गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अलवर के इसी एप गुरु का लंदन में पूर्व में जिक्र किया था, जिसके बाद इमरान को प्रसिद्धि मिली।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मन की बात से पूरे विश्व में सुर्खियों में आए अलवर के एप गुरु इमरान खान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात के 100वें एपिसोड के बारे में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसे लोगों को पूरे देश के सामने लाते हैं, जो जमीन से जुड़े होते हैं और उनके किए गए कार्यों को पूरे देश के पूरे विश्व के सामने बताते हैं। यह बहुत अच्छी पहल है और यह जारी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 100 एपिसोड पूरे कर लिए, उसी तरह मैंने भी उनसे प्रेरणा लेकर अब तक शिक्षा के क्षेत्र में 100 एप तैयार कर ली हैं। जिसके पूरे भारत सहित अन्य देशों में तीन करोड़ यूजर हैं।
इमरान खान ने कहा हालांकि मैं पहले से ही शिक्षा के क्षेत्र की ऐप बना रहा था, लेकिन सबसे ज्यादा इस क्षेत्र में काम करने के लिए मुझे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रेरणा दी है और आज उसी के परिणाम स्वरूप 100 एप बना लिए हैं। उन्होंने एनसीईआरटी और राज्य सरकारों के लिए भी ऐप बनाई हैं। इमरान ने कहा मन की बात में प्रधानमंत्री जमीन से जुड़े हुए लोगों को आम पब्लिक के सामने लाकर उनकी खासियत रखते हैं और उनके प्रेरणा सोत्र बनते हैं। मेरी बनाए हुए एप शिक्षा के क्षेत्र में, चाहे बच्चा गरीब हो या अमीर हो, शहरी हो या ग्रामीण हो, सबके पढ़ाई के काम आते हैं।
हर हाथ में स्मार्ट फोन
आज हर बच्चे के हाथ में, हर परिवार के हाथ में मोबाइल है। सभी को फायदा मिल रहा है। ऐसे में शिक्षा के रूप में यह ऐप बहुत लाभदायक है। उन्होंने बताया कि वह प्रतियोगी परीक्षाओं में काम आने वाली 20 ऐप भी बना चुके हैं। जिससे प्रतिभागियों को बहुत फायदा हो रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित सिलेबस से लबरेज वो ऐप हैं। इसके अलावा हर क्लास वाइज ऐप हैं, जो हर क्लास के छात्रों को फायदेमंद हो रही हैं। इन एप्स में जरूरत के हिसाब से नए फीचर, नए अपडेट, और नए कंटेंट जोड़ते रहते हैं। हर ऐप का नया वर्जन चलता रहता है।
कोविड लॉकडाउन के समय से ही ऑनलाइन एप्स की बहुत ज्यादा जरूरत महसूस हुई
इमरान खान ने बताया कि कोविड लॉक डाउन में इन एप्स की सबसे ज्यादा जरूरत महसूस हुई। स्कूल बंद थे। घरों में बच्चों को पढ़ाई के लिए ऑनलाइन क्लासेज चाहिए थी। ऐसे में ये ऐप बच्चों के लिए कारगर सिद्ध हुई। उसी दौरान ही स्टूडेंट्स को ऑनलाइन तकनीक सबसे ज्यादा समझ आई। अब इन एप्स के प्रति स्टूडेंट्स का रुझान बढ़ता जा रहा है। यूजर भी लगातार बढ़ रहे हैं। मैं खुद शिक्षक हूँ और ऐसे में जिम्मेदारी बढ़ जाती है। इसलिए ऐप बनाने के साथ-साथ शिक्षा पर भी पूरा ध्यान दे रहा हूँ। इन एप्स को बनाने के लिए परिवार, सहयोगियों और समाज का पूरा सपोर्ट मिलता है। इन ऐप में शिक्षा से जुड़े सारे अपडेट हैं और मुफ्त शिक्षा सामग्री इसमें मिलती है । जो पूरी तरह बच्चों को आकर्षण का केंद्र बनती है। आगामी समय ऐसा आ रहा है जहां ऐप के माध्यम से शिक्षा आसान होगी और मुफ्त शिक्षा देना ही उद्देश्य है ।आगे भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के रूप में यह ऐप बहुत काम आएंगी। नई तकनीकी सहायता से स्टूडेंट्स पढ़ सकते हैं, जो तकनीकी बिंदु किताबों में नहीं मिलते वह ऐप के माध्यम से मिल जाते हैं।
अलवर के मालाखेड़ा का इमरान खान कैसे बना एप गुरु?
प्रधान मंत्री ने लंदन में 60 हजार लोगों के सामने कहा था कि भारत के गांवों में एप गुरु इमरान खान बसते हैं। इसके बाद इन्हें देश भर में कई जगह सम्मानित किया गया। जब वह पहली बार पीएम से मिले, तो ये आभास भी नहीं हुआ कि वह प्रधान मंत्री से मिल रहे हैं। उन्होंने इन एप्स के बारे में काफी उत्साह वर्धन किया था। अलवर के मोहम्मद इमरान मालाखेड़ा क्षेत्र के खारडा गांव में पैदा हुए। गरीब परिवार से इमरान ने जब पढाई शुरू की थी, तो गांव में बिजली भी उपलब्ध नहीं थी और लालटेन की रोशनी में पढ़ कर शिक्षा प्राप्त की और राजकीय संस्कृत माध्यमिक विधालय में शिक्षक के पद पर तैनात है। वर्ष 2011 में स्कूल की वेबसाइट बनाने का काम शुरू किया था, इसके बाद तत्कालीन जिला कलेक्टर आशुतोष एटी पेंडणेकर ने शिक्षा में नवाचार के लिए एकता प्रोजेक्ट शुरू किया और इमरान को इस प्रोजेक्ट से जोड़ा ।इसके बाद उन्होंने मोबाइल एप्स बनाना शुरू किया।