जिले में इस बार इंद्रदेव मेहरबान रहे हैं, कल रात भर हुई बारिश के बाद आज रियासतकालीन सिलीसेढ झील की पाल से टकराकर पानी की चादर चलने लगी है। करीब डेढ़ दशक बाद यह दृश्य देखने के लिए लोग बड़ी संख्या में इस झील पर पहुंच रहे हैं लेकिन फिसलन और रपटन होने से कोई भी बड़ी घटना घटित हो सकती है, इसके लिए सतर्कता बरतना जरूरी है।
उपखंड अधिकारी, अलवर प्रतीक चंद्रशेखर जूईकर ने झील पर जाने वाले लोगों से आग्रह किया है कि वे झील की पाल पर नहीं घूमें व सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर ही सिलीसेढ झील पर जाएं। गौरतलब है कि सिलीसेढ के पूरा भरने से इसके ओवर फ्लो का पानी अब जयसमंद बांध में जाने लगा है। अब यदि एक बारिश और हो गई तो जयसमंद बांध में पानी बढ़ जाएगा और इससे कुओं का जल स्तर भी बढ़ेगा।