शहर के राजीव गांधी सामान्य चिकित्सालय (जिला अस्पताल) में मोर्चरी घर के सामने अस्पताल के अंदर का संक्रमित कचरा खुले में पड़ा हुआ है। पिछले काफी दिनों से यहां ऐसे ही हालात बने हुए हैं। अस्पताल के अंदर से संक्रमित कचरा लाकर यहां डाल दिया जाता है लेकिन इसके बाद न तो नगर निगम या बाकी कर्मचारियों के द्वारा इस कचरे को उठाया जा रहा है और ना ही अस्पताल प्रशासन की तरफ से इसका कोई इंतजाम किया गया है।
जिला अस्पताल में रोजाना हजारों की संख्या में मरीज आते हैं, जिसकी वजह से काफी भारी मात्रा में कचरा निकलकर आता है लेकिन अस्पताल की तरफ से इस संक्रमित कचरे को न तो ढंका गया ना ही इसे तय स्थान पर डाला गया है। जिस जगह पर कचरे का ढेर लगा है वहीं सामने मोर्चरी घर भी है और इसके बगल में ही पार्किंग भी है। ऐसे में यहां उपचार मरीज या उनके परिजनों में से यदि कोई इस संक्रमित कचरे की वजह से बीमार हो जाता है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?
जिला कलेक्टर अर्तिका शुक्ला ने एक तरफ जहां अतुल्य अलवर, स्वच्छ अलवर मिशन के तहत एक पोर्टल लॉन्च किया है ताकि उस पर शिकायत दर्ज करवाकर गंदगी की समस्या का तुरंत निराकरण हो सके, वहीं दूसरी तरफ जिला अस्पताल प्रशासन जिला कलेक्टर के आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए दिखाई दे रहा है। हालात यह हैं कि यह कचरा हाथोंहाथ उठना चाहिए लेकिन कई दिनों से कचरा यूं ही पड़ा हुआ है और मोर्चरी में लाश के साथ आने वाले लोगों को मुंह पर हाथ या तौलिया रखना पड़ता है। इस कचरे के ढेर के बारे में अस्पताल प्रशासन का कहना है कि नगर निगम को यह कचरा उठाना है लेकिन पिछले कई दिनों से कचरा नहीं उठाया गया है।