अलवर में करणी माता के मेले के दौरान डीजे पर कानफोड़ू आवाज में अश्लील गाने बजाने से श्रद्धालुओं और वन्यजीवों को काफी परेशानी हो रही है। रामायणी हनुमान मंदिर के पास हो रहे 9 दिवसीय रामचरितमानस पाठ में भी शोर के कारण बाधा आ रही है। वन विभाग और प्रशासन को शिकायतों के बावजूद डीजे बंद कराने की कार्रवाई नहीं की गई। इस क्षेत्र में बाघ और अन्य वन्यजीवों की साइटिंग भी मेले की शोर-शराबे के कारण बंद हो गई है, जिससे श्रद्धालु और जंगली जानवर दोनों ही असहज महसूस कर रहे हैं।
प्रतिदिन यह सब चलता रहता है। रामायणी मंदिर में मंद आवाज में चल रहे 9 दिवसीय अखंड रामचरित मानस पाठ में भी पाठक और श्रावक परेशान होते रहे। रात को सवा 9 बजे के करीब वन अधिकारी शंकर सिंह शेखावत से फॉरेस्ट चौकी से स्टाफ भेजकर इनको पाबंद कराने का आग्रह किया गया, लेकिन रात्रि 12 बजे तक भी उन्होंने इसे बंद कराने की जहमत नहीं उठाई। इस क्षेत्र में बाघ बघेरे सहित अन्य वन्यजीवों की आए दिन साइटिंग होती रहती है। वे भी अपने घर में असहज महसूस करते हैं। वहीं यहां छोटे मोटे अनेक धार्मिक स्थल बने हुए हैं, जिनमें श्रद्धालुजन नवरात्र में दिनरात अनुष्ठान करते हैं। उनको भी इस ध्वनि प्रदूषण से बहुत परेशानी होती है।
जिला कलेक्टर आर्तिका शुक्ला से यहां की मेला ड्यूटी में सिर्फ संवेदनशील अफसर-कर्मियों को ही लगाने की मांग की गई है। सबसे बड़ी बात यह है कि करणी माता का मंदिर सरिस्का के बफर जोन में आता है और यहां करीब नो टाइगर हैं, जिनकी साइटिंग अक्सर होती रहती है। इन दिनों जब से मेला शुरू हुआ है तब से यह साइटिंग बंद है, क्योंकि मेले में भारी भीड़ पहुंच रही है, जिससे ये टाइगर घने जंगलों में चले गए हैं। यह मेला यहां बरसों से हो रहा है। किसी को कोई आपत्ति नहीं है लेकिन माइक पर रोक अवश्य लगनी चाहिए, क्योंकि इससे न केवल जंगली जानवर बल्कि मेले में आने वाले श्रद्धालु भी परेशान हो रहे हैं।