अलवर सब्जी मंडी में अब प्याज की फसल की आवक जोरदार हो रही है, लेकिन किसानों का आरोप है कि आढ़ती अपनी मनमर्जी के चलते भाव लगा रहे हैं, जिसके चलते किसानों को खासा नुकसान होने की संभावना है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो आक्रोशित किसानो ने विरोध स्वरूप मंडी का गेट बंद कर धरना शरू कर देने की चेतावनी दे दी है। यहा अगर बाहर से कोई व्यापारी होता तो अच्छा भाव मिलता, लेकिन ये लोग बाहर के व्यापारी को यहा नहीं आने देते और यहां के आढ़ती अपनी खुद की मनमर्जी चलाते है। किसान बहुत मेहनत से अपनी फसल तैयार करके यहां तक लाते है। अगर यहां सही दाम नहीं मिले तो आखिर किसान कहां जाएगा। इस समय का भाव 2000 का चल रहा है, लेकिन यहां के आढ़ती 1500 से 1700 के भाव में प्याज खरीद रहे हैं। अगर ऐसा चलता रहा तो किसानों को बहुत मोटा नुकसान हो जाएगा।
वहीं, प्याज व्यापारी पप्पू सैनी ने बताया कि मजदूरों के अभाव के चलते काम थोड़ा कम हो रहा है, क्योंकि अधिकतर मजदूर बिहार और उत्तर प्रदेश से हैं, जो छठ पूजा के चलते अभी नही पहुंच पा रहे हैं, इसकी वजह से थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन फिर भी खरीददारी सुचारू रूप से चल रही है। उम्मीद है शाम होते-होते सभी किसान भाइयों की प्याज अच्छे दामों में बिक जाएगी। पिछले दो तीन दिन से मंडी में करीब 50 हजार कट्टे प्याज के पहुंच रहे हैं, जोकि अपने आप में बड़ा टारगेट है। इस समय प्याज के दाम भी ठीक मिल रहे हैं, क्योंकि पिछली बार के मुकाबले कीमत ज्यादा मिल रही है। किसानों को प्याज के थोक भाव दोगुना मिलने से किसानों के चेहरे पर खुशी देखी जा सकती है। अलवर की प्याज देश भर में विख्यात है।
मंडी व्यापारी पप्पू भाई प्रधान ने बताया कि इस बार बंपर पैदावार होने से किसान के चेहरे पर खुशी है। पिछले साल के मुकाबले इस साल प्याज का उत्पादन अच्छा हुआ है। थोक में प्याज 35 रुपये से लेकर 55 रुपये किलो के भाव से बिकी है। इससे किसानों के चेहरे पर खुशी है। पिछले साल जिले में चार लाख मीट्रिक टन प्याज हुआ था। वहीं, इस बार यह 6 लाख मीट्रिक टन के आसपास पहुंचने की उम्मीद है। आगामी 10 से15 दिन में प्याज की आवक में और तेजी आएगी। यह प्याज की फसल का पीक समय होगा। आमतौर पर प्याज फरवरी तक आता है। प्याज व्यापारियों और किसानों का कहना है कि हमारे अलवर की प्याज की 16 राज्यों में मांग है।
आगामी दिनों में प्याज की डिमांड देश के उत्तरी और पूर्वी राज्यों में भी बढ़ेगी। इसके लिए थोक प्याज मंडी में तैयारियां शुरू हो गई है। अलवर में प्याज ऐसे समय होती है जब देश में कही भी प्याज नहीं होता। ऐसे में प्याज की मुंह मांगी कीमत भी मिलती है। अलवर में प्याज का निर्यात कई देशों में भी होता है। अलवर के प्याज को लाल प्याज के नाम से भी जाना जाता है और इस प्याज की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह स्वाद में अच्छा होता है और इसकी सुगन्ध भी बेहतर होती है। अलवर में बड़ी तादाद में प्याज की पैदावार होती है और इसकी पैदावार को देखते हुए अलवर ओर खैरथल में अलग से प्याज मंडी भी स्थापित की गई है, जहां प्रतिदिन प्याज की अच्छी आवक होती है। इसके अलावा मालाखेड़ा और लक्ष्मण गढ़ में भी 5 से 10 हजार कट्टे प्याज आ रही है। पिछले कई सालों से प्याज का जिले में अच्छा उत्पादन हुआ है और भाव भी अच्छा मिल रहा है अन्यथा एक बार तो ऐसी हालत हो गई थी कि लोग प्याज लेकर दिल्ली गए तो सही, लेकिन भाव सुनकर प्याज की गाड़ी छोड़ कर लौट आए, लेकिन अब पिछले के सालों से किसानों को प्याज में अच्छा दाम मिल रहा है। इससे प्याज का रकबा भी काफी बढ़ गया है।