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रामगढ़ उपचुनाव: हिंदू-मुस्लिम में उलझी इस सीट पर तीन दशक से दो परिवारों का राज, क्या इस बार बदलेगा रिवाज

Fri, 11 Oct 2024 08:47 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर

सार

राजस्थान के अलवर जिले की रामगढ़ विधानसभा सीट पर आगामी उपचुनाव महत्वपूर्ण है। मेव मुसलमानों की बड़ी आबादी वाली इस सीट पर 1990 के बाद से हिंदू-मुस्लिम समीकरणों का प्रभुत्व रहा है। कांग्रेस के जुबेर और भाजपा के ज्ञानदेव आहूजा के बीच लंबे समय से सियासी मुकाबला होता आया है। जुबेर, कांग्रेस से चुनाव लड़ने वाले पहले मुस्लिम उम्मीदवार थे और कई बार जीत दर्ज कर चुके हैं।
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अलवर की रामगढ़ सीट में उपचुनाव। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान में 2023 के विधानसभा चुनावों में सबसे भीषण मुकाबले वाली सीटों में एक रही थी अलवर की रामगढ़ विधानसभा सीट। विधायक जुबेर खान के निधन के बाद यह सीट खाली है। हिंदू-मुस्लिम समीकरणों में फंसी अलवर जिले की इस सीट पर बीते तीन दशकों से दो परिवारों का एक छत्र राज रहा, लेकिन क्या इस बार रिवाज बदलेगा? जानिए इस रिपोर्ट में…

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राजस्थान की जिन सात विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं उनमें अलवर की रामगढ़ सीट भी है। मेवात क्षेत्र में आने वाली इस सीट की डेमोग्राफी बात करें तो अवलर जिले की तिजारा, लक्ष्मणगढ़, भरतपुर की नगर, कामा और हरियाणा नूह इस सीट से सटी मेवात बेल्ट का हिस्सा हैं। हालांकि लक्ष्मणगढ़ बाद में अलवर ग्रामीण में शामिल होने की वजह से अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व हो गई। जातिगत समीकरणों की बात करें तो यहां सबसे बड़ी आबादी मेव मुसलमानों की है। इसके बाद यहां पंजाबी, राजपूत, बनिया, सिख और एससी आबादी भी बड़ी संख्या में रहती है।
 
1990 में हिंदू-मुस्लिम समीकरणों में उलझी सीट
रामगढ़ सीट शुरुआत से हिंदू-मुस्लिम समीकरणों में उलझी हुई नहीं थी। यह ट्रेंड 1990 में शुरू हुआ, जब कांग्रेस ने यहां माचड़ी गांव के जुबेर को अपना प्रत्याशी बनाया। पहले ही चुनाव में जुबेर ने भाजपा के तत्कालीन विधायक रुघवर दयाल को बड़े अंतर से हरा दिया। मेव वोटों के ध्रुवीकरण को इसकी वजह माना गया। इसके बाद अगले चुनावों में भाजपा ने अपने हार्डकोर चेहरे ज्ञानदेव आहूजा को मैदान में उतारा। 
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टक्कर जोरदार रही
आहूजा चुनाव हर गए लेकिन टक्कर जोरदार रही। इसके बाद दोनों के बीच 6 बार आमने-सामने टक्कर हुई। इसमें तीन बार आहूजा और तीन बार जुबेर ने मुकाबला जीता। पिछले विधानसभा चुनावों में भाजपा ने ज्ञान देव बे भतीजे जय आहूजा को टिकट दिया। जय और जुबेर के बीच एक तरफा मुकाबला हुआ, जिसमें जुबेर बड़े अंतर से जीते। 

जुबेर इस सीट चुनाव लड़ने वाले पहले मुस्लिम 
मेव समुदाय से आने वाले जुबेर इस सीट पर कांग्रेस के टिकट से चुनाव लड़ने वाले पहले मुस्लिम थे। जुबेर से पहले कांग्रेस के टिकट पर यहां 1977 और 1980 में जय किशन चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे, लेकिन 1990 के बाद इस सीट पर अब तक 8 चुनाव हो चुके हैं। कांग्रेस ने इनमें से सात बार जुबेर को और 2018 में जुबेर की पत्नी सफिया जुबेर को टिकट दिया।

इस बार बीजेपी-कांग्रेस दोनों बदल सकते हैं टिकट
कांग्रेस ने 2023 में सिटिंग विधायक सफिया का टिकट काटकर उनके पति जुबेर को दिया था। वहीं भाजपा ने अपने विधायक प्रत्याशी ज्ञानदेव आहूजा की जगह उनके भतीजे जय आहूजा को मैदान में उतारा था। जय आहूजा यह चुनाव लगभग 60 हजार वोटों के बड़े अंतर से हारे थे। इसलिए उपचुनावों में भाजपा यहां अपने बागी सुखवंत को चेहरा बना सकती है। वहीं कांग्रेस भी इस बार जुबेर परिवार से बाहर निकल कर अपना नया चेहरा तलाश रही है।

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