पतंग बाजार में पतंग की खरीददारी करते शहरवासी
- फोटो : अमर उजाला
अलवर में राजशाही काल से रक्षाबंधन के दिन पतंग उड़ाने की परंपरा है। जिसके चलते अलवर के मुख्य पतंग बाजार मालाखेड़ा में पतंग और मांझे की खरीददारी हो रही है। लेकिन पतंग-मांझे की खरीददारी पर महंगाई की मार पड़ी है। अबकी बार 20 से 25 फीसदी तक दाम ज़्यादा हैं।
अलवर और मालाखेड़ा के बाजार में कई तरह की पतंगें हैं। इनमें कार्टून, नेता, अभिनेता, चंद्रयान, गदर-2, चांद, सितारा, प्लेन, आड़ी, तिरछी पतंग, पन्नी और चमकने वाली पतंगें, बरेली और रामपुरा, जयपुरी पतंगों समेत और तरह-तरह की रंग बिरंगी फिरकी चारखियाँ उपलब्ध हैं। लेकिन इस बार मंहगाई की मार के कारण पतंगों का बाजार फीका नजर आ रहा है। जिसके कारण पतंग-मांझे और फिरकी चरखी की बिक्री पर इसका विपरीत असर पड़ा है। इस कारण व्यापारियों में नुकसान को लेकर चिंता है।
पतंग और मांझे की खरीददारी पर महंगाई की मार
इस बार पतंग-माँझे और फिरकी-चरखी के दाम में 20-25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। एक कौड़ी (20 नग) पतंगों की एक कीमत 50 से 250 रुपये तक है। मांझे की डोर अलग अलग साइज़ की चर्खियों में गत्तों के हिसाब से 250 से लेकर 600 रुपए तक है। पतंग व्यवसाई ने बताया बढ़ती महंगाई की मार पतंग बाजार पर भी पड़ रही है। पहले जहां एक-दो रुपए में पतंग आसानी से उपलब्ध हो जाती थी। अब उनके दाम 5 से 10 रुपए तक हो गए हैं। वहीं बच्चों में मोबाइल गेम के प्रति दीवानगी और पढ़ाई के दबाव के कारण भी बाजार में खरीददारी कम है।