अजमेर में गुरुवार देर रात बोराज तालाब की पाल टूटने के बाद स्वास्तिक नगर त्रासदी का केंद्र बन गया है। घटना को 36 घंटे से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन हालात अभी भी सामान्य नहीं हो पाए हैं। कॉलोनी की गलियों और घरों में जलभराव और कीचड़ ने लोगों का जीवन नरक बना दिया है। करीब तीन फीट पानी अब भी जमा है, जिससे घर दलदल में तब्दील हो गए हैं।
अंधेरे में सफाई और टूटा हौसला
जलभराव के कारण बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप है। लोग अंधेरे में ही सफाई करने को मजबूर हैं। महिलाएं और बच्चे दिन-रात घरों से कीचड़ और गाद निकालने में जुटे हैं, लेकिन अथक प्रयासों के बावजूद हालात काबू में आते नहीं दिख रहे। हर ओर बदबू और गंदगी का माहौल लोगों की तकलीफें बढ़ा रहा है।
ज्योति की पीड़ा, आंसुओं में ढली कहानी
स्थानीय निवासी ज्योति का घर इस त्रासदी की दर्दनाक तस्वीर पेश करता है। उनका कहना है कि पिछले 24 घंटे से महिलाएं और बच्चियां लगातार सफाई कर रही हैं, लेकिन घर पूरी तरह दलदल में बदल गया है। पानी में डूबने से फर्नीचर और घरेलू सामान नष्ट हो गया, वहीं किचन की सारी खाद्य सामग्री भी खराब हो गई। मजबूरी में छोटे बच्चों को रिश्तेदारों और पड़ोसियों के घर भेजना पड़ा। संवाद के दौरान ज्योति की आंखें भर आईं और उन्होंने प्रशासन से जल्द मदद की गुहार लगाई।
दूसरे दिन भी बेहाल हालात
स्थानीय लोगों का कहना है कि दूसरे दिन भी राहत के हालात नजर नहीं आ रहे। जलभराव पूरी तरह नहीं निकलने से घरों का सामान सड़ चुका है और बीमारी फैलने का खतरा बढ़ गया है। लोग अपने स्तर पर सफाई कर रहे हैं, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण संघर्ष और भी कठिन हो गया है।
प्रशासन की सक्रियता का दावा
अजमेर जिला कलेक्टर लोक बंधु ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में एसडीआरएफ और नगर निगम की टीमें लगातार तैनात हैं। जल निकासी की व्यवस्था की जा रही है और प्रभावित परिवारों का सर्वे भी किया जा रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि नुकसान का आकलन कर मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा।
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नेताओं का दौरा और चिंता
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार को स्वास्तिक नगर का दौरा किया। उन्होंने कहा कि स्थिति बेहद गंभीर है और सरकार को तत्काल राहत पैकेज की घोषणा करनी चाहिए। गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से विशेष पैकेज देने की मांग करने की बात कही। वहीं, विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने शुक्रवार को क्षेत्र का निरीक्षण कर अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित हर परिवार तक सहायता पहुंचाई जाए और खासतौर पर बच्चों व बुजुर्गों की सुरक्षा पर ध्यान दिया जाए।
त्रासदी की असल तस्वीर
स्वास्तिक नगर का हर घर ज्योति जैसी ही कहानी कह रहा है। लोग अपने टूटे सामान और बर्बाद जीवन को देखकर हताश हैं। बच्चों और बुजुर्गों की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है। यह घटना केवल प्राकृतिक आपदा ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक तैयारी और लापरवाही की पोल भी खोलती है। आज स्वास्तिक नगर आंसुओं और कीचड़ में डूबा हुआ है और यहां के लोग जल्द से जल्द राहत और सामान्य जीवन की वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
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