सुल्तानपुर में सूफी संत ख़्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की साहिबज़ादी बीबी हाफ़िज़ा का सालाना उर्स शुक्रवार को भव्य श्रद्धा और पारंपरिक रिवायतों के साथ संपन्न हुआ। उर्स के अवसर पर दरगाह क्षेत्र में रूहानियत का माहौल बना रहा, जहां देश-विदेश से आए जायरीन और अकीदतमंदों ने बड़ी संख्या में शिरकत की।
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अधिवक्ता डॉ. सैयद राग़िब चिश्ती ने बताया कि बीबी हाफ़िज़ा ख़्वाजा साहब की अत्यंत प्रिय बेटी थीं। उनके जन्म के समय ख़्वाजा साहब ने उन्हें अपना लब चखाया था और उन्होंने बचपन में ही क़ुरान पढ़कर सुनाया। इसी कारण उन्हें बीबी हाफ़िज़ा कहा जाने लगा। माना जाता है कि उनकी दुआओं से बेऔलादों को औलाद की नेमत मिलती है। बीबी हाफ़िज़ा ने करीब 850 वर्ष पूर्व हैपी वैली में चिल्ला किया था, जहां आज भी उनका चिल्ला मौजूद है।