राजस्थान की अजमेर लोकसभा सीट पर इस बार भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों ने जाट प्रत्याशी मैदान में उतारकर चुनाव को रोचक बना दिया था। दोनों ही प्रत्याशी जाट होने के कारण दोनों में मुकाबला कांटे का देखने को मिला। भाजपा प्रत्याशी भागीरथ चौधरी को इस बार भी मोदी का सहारा है तो कांग्रेस प्रत्याशी रामचंद्र चौधरी डेयरी अध्यक्ष होने के चलते दूधियों के भरोसे जीत की आस लगाए बैठे हैं।
अजमेर संसदीय सीट पर लोकसभा चुनाव का मुकाबला जाट समाज के कद्दावर नेताओं के बीच दिलचस्प और रोमांचक रहा, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी के भागीरथ चौधरी की टक्कर छह बार अजमेर सरस डेयरी के अध्यक्ष रहे और कांग्रेस के दिग्गज नेता रामचंद्र चौधरी से हुई है। अजमेर संसदीय क्षेत्र से लोकसभा चुनाव के प्रत्याशी के रूप में ताल ठोककर दोनों एक दूसरे के सामने खड़े हैं और अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं।
लोकसभा चुनाव के दूसरे फेज के तहत 26 अप्रैल को अजमेर लोकसभा सीट पर वोटिंग हुई थी। भाजपा के भागीरथ चौधरी और कांग्रेस के रामचंद्र चौधरी के बीच यहां सीधा मुकाबला है। नतीजे चार जून को सामने आएंगे, जिसका सभी को बेसब्री से इंतजार है। अजमेर लोकसभा क्षेत्र की बात करें तो यहां भाजपा ने 1989 में एंट्री की थी, अजमेर लोकसभा क्षेत्र में भाजपा ने सात बार सांसद चुनाव जीते हैं। भागीरथ चौधरी ने 2019 में अजमेर से सांसद चुनाव जीता था, लेकिन 2023 के विधानसभा चुनाव मे भागीरथ चौधरी को हार का सामना करना पड़ा था।
भागीरथ मोदी के सहारे
अजमेर लोकसभा क्षेत्र से भाजपा ने भागीरथ चौधरी को इस बार दोबारा मैदान में उतारा है। 2019 में भागीरथ चौधरी अजमेर लोकसभा क्षेत्र से सवा चार लाख मतों से चुनाव जीते थे। पिछली बार की तरह इस बार भी भागीरथ चौधरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से वोट मांगते हुए नजर आए थे और उन्हें विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहारे ही वो अपनी नैया को पार लगाएंगे। भागीरथ चौधरी अपनी जीत का दावा पांच लाख से अधिक मतों से कर रहे हैं। हालांकि भागीरथ चौधरी ने 2023 का विधानसभा चुनाव अपने ही गृह क्षेत्र किशनगढ़ से लड़ा था। खास बात ये रही कि भागीरथ चौधरी उस चुनाव में तीसरे स्थान पर रहे थे, जबकि भाजपा की विचारधारा को छोड़कर कांग्रेस का हाथ थामने वाले विकास चौधरी को यहां जीत मिली थी।
दूधियों के भरोसे कांग्रेस के चौधरी
कांग्रेस ने भी जाट समाज से नए चेहरे को उम्मीदवार बनाया है। यहां कांग्रेस ने रामचंद्र चौधरी पर दांव खेला है, जो जिला दुग्ध सहकारी समिति में 30 साल से अध्यक्ष हैं, लेकिन वे कभी विधानसभा का भी चुनाव नहीं जीत पाए। चौधरी को दो बार कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में टिकट दिया था। वहीं, दो बार कांग्रेस से बगावत करके रामचंद्र चौधरी चुनाव लड़ चुके हैं। मगर चारों ही चुनाव में उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। जिला दुग्ध सहकारी समिति से तीन दशक से जुड़े होने के कारण रामचंद्र चौधरी की जिले के पशुपालकों और किसानों में अच्छी पकड़ है, यूं तो पशु पालकों में हर समाज के लोग हैं, लेकिन ज्यादातर जाट और गुर्जर ही कृषि और पशु पालन से जुड़े हुए हैं। वहीं, अजमेर लोकसभा क्षेत्र जाट और गुर्जर बाहुल्य है। ऐसे में रामचंद्र चौधरी की गुर्जर समाज में अच्छी पकड़ भी है, यदि जाट मतों का विभाजन होता है और गुर्जर, मस्लिम और एससी मत रामचंद्र चौधरी के पक्ष में जाते हैं तो उनकी स्थिति मजबूत हो सकती है।
अजमेर लोकसभा सीट पर यह रहा था मतदान प्रतिशत
अजमेर लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरे भाजपा-कांग्रेस सहित 14 उम्मीदवारों का भाग्य ईवीएम में बंद हो चुका है। पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले अजमेर में इस बार वोटिंग प्रतिशत कम रहा। पिछली बार 67.32% वोटिंग हुई थी। इस बार 59.65% मतदान हुआ। गर्मी और मतदाताओं में उत्साह कम होने के कारण वोटिंग में 7.67% की गिरावट आई। मतदान प्रतिशत पुरूषों का 61.17, महिलाओं का 58.08 तथा तृतीय लिंग मतदाताओं का 59.26 रहा। सर्वाधिक मतदान प्रतिशत राजकीय प्राथमिक विद्यालय दान्ता (पुष्कर) में 85.61 प्रतिशत रहा। न्यूनतम मतदान राजकीय सीनियर सेकेंडरी विद्यालय बलवन्ता में 0.89 प्रतिशत दर्ज किया गया। 19 लाख 95 हजार 699 मतदाताओं में से 11 लाख 90 हजार 439 ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। यह 59.65 प्रतिशत है। क्षेत्र के 10 लाख 14 हजार 988 पुरूषों में से 6 लाख 20 हजार 878 (61.17 प्रतिशत), 9 लाख 80 हजार 684 महिलाओं में से 5 लाख 69 हजार 545 (58.08 प्रतिशत) तथा 27 तृतीय लिंग मतदाताओं में से 16 (59.26 प्रतिशत) द्वारा मतदान किया गया।
ये है अजमेर लोकसभा सीट का इतिहास
अजमेर लोकसभा क्षेत्र का गठन आजादी के ठीक बाद ही हो गया था। वर्ष 1989 में अजमेर में भाजपा की एंट्री हुई और इसके बाद हुए लोकसभा चुनाव में सात बार भाजपा के सांसद बने। मोदी लहर में हुए वर्ष 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में लगातार भाजपा की जीत हुई। 2014 में सांवरमल जाट और 2019 में भागीरथ चौधरी सांसद बने। 2018 में हुए लोकसभा उपचुनाव में भाजपा को हार का सामना भी करना पड़ा। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव (नवंबर 2023) में भाजपा ने मौजूदा सांसद भागीरथ चौधरी को विधानसभा चुनाव में उतारा, लेकिन वे चुनाव हार गए। हारे हुए नेता को भाजपा ने फिर से लोकसभा चुनाव में उतार दिया। चौधरी का मुकाबला कांग्रेस के रामचंद्र चौधरी से है जो पिछले कई साल से डेयरी के चेयरमैन हैं। पिछली बार यहां बीजेपी के भागीरथ चौधरी की जीत हुई थी। 1989 से 1996 तक यहां रासा सिंह रावत तीन बार लगातार बीजेपी को जीताया था, लेकिन इसके बाद 1998 में कांग्रेस की प्रभा ठाकुर ने जीत हासिल की थी। 1999-2004 में एक बार फिर भाजपा रासा सिंह ने जीत हासिल की। 2009 में इस सीट पर कांग्रेस के सचिन पायलट ने जीत हासिल की, जबकि 2014 में बीजेपी के सांवर लाल जाट ने जीत हासिल की वहीं 2018 के उपचुनाव में कांग्रेस के रघु शर्मा जीते, फिर 2019 में भागीरथ चौधरी ने जीत हासिल की थी।
ये है अजमेर के प्रमुख मुद्दे
अजमेर में ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह होने के साथ ही विश्व का एकमात्र इकलौता ब्रह्मा मंदिर भी पुष्कर में स्थित है, जो इसी लोकसभा सीट में आता है। ऐसे मे धार्मिक स्थल होने के चलते राजस्थान की अजमेर लोकसभा सीट काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। यहां सबसे बड़ी समस्या पानी की है, विधानसभा चुनाव में भी जनता ने पानी की समस्या को चुनावी मुद्दा बनाया था। राजस्थान के पश्चिमी जिलों के कई हिस्सों में सिंचाई और पेयजल के लिए नहर का पानी पहुंच गया है, लेकिन राजस्थान का दिल अजमेर प्यासा ही है। हालांकि यहां बीसलपुर परियोजना से पेयजल सप्लाई होती है। इसे अजमेर की लाइफ लाइन भी कहा जाता है, लेकिन अब यह अजमेर के लिए पर्याप्त नहीं है। दूसरी अजमेर में सीवरेज की समस्या वर्षों पुरानी है, आरयूडीपीआई ने 200 करोड़ रुपए खर्च करके शहर में सीवरेज के लिए पाइपलाइन डाली थी। उसके बाद स्मार्ट सिटी योजना के तहत भी सीवरेज के लिए 300 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसके बावजूद सीवरेज की सुविधा अजमेर के कई क्षेत्रों की जनता को अभी तक नहीं मिल पाई है, जबकि देश के 100 स्मार्ट शहरों में अजमेर भी शामिल है। अजमेर की पहचान धार्मिक पर्यटन नगरी के रूप में भी है। पुष्कर में विश्व का इकलौता जगत पिता ब्रह्मा का मंदिर और पवित्र सरोवर है। पुष्कर में देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी बड़ी संख्या में पर्यटक आते है, तीर्थराज गुरु पुष्कर हिंदुओं की सबसे बड़ी धार्मिक स्थली है। पुष्कर में सैकड़ों मंदिर हैं, पुष्कर का धार्मिक और पौराणिक महत्व है, इसके बावजूद पुष्कर विकास में काफी पीछे है। पुष्कर के पवित्र सरोवर में गंदे पानी से श्रद्धालुओं के धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचती है। केंद्र और राज्य सरकार ने अभी तक इसकी रोकथाम के लिए कुछ खास काम नहीं किया। काशी और उज्जैन में शानदार कॉरिडोर बनाए गए, ऐसे में पुष्कर के लोगों को भी आस है कि यहां पर कॉरिडोर बने और पुष्कर का विकास भी उसके धार्मिक और पर्यटन के महत्व के अनुसार हो।
अजमेर से वाया बूंदी-कोटा रेल मार्ग की मांग
वहीं, अजमेर से वाया बूंदी-कोटा रेल मार्ग की मांग भी काफी पुरानी है। हर चुनाव में इस मांग को पार्टियां मुद्दा बनाती हैं, लेकिन चुनाव के बाद इसे भुला दिया जाता है। इसी प्रकार नसीराबाद से देवली राष्ट्रीय राजमार्ग बनाए जाने की भी मांग जनता उठा रही है। अजमेर से पुष्कर के बीच ट्रेन है, लेकिन पुष्कर-मेड़ता रेल मार्ग नहीं होने के कारण इस ट्रेन का फायदा लोगों को ज्यादा नहीं मिल पा रहा है। पुष्कर-मेड़ता रेल मार्ग जुड़ने से पश्चिमी राजस्थान से अजमेर की कनेक्टिविटी बढ़ जाएगी और इससे पर्यटन और उद्योग व्यापार को फायदा होगा। अजमेर में रेल का इतिहास भी ब्रिटिश कालीन है। देश का पहला इंजन अजमेर के रेल कारखाने में ही बना था। अजमेर में कैरिज और लोको कारखाने हैं। इन कारखानों और रेलवे अस्पताल के अपग्रेडेशन की मांग भी काफी पुरानी है।
मतगणना के लिए यह रहेगी व्यवस्था
रिटर्निंग अधिकारी डॉ. भारती दीक्षित के मुताबिक लोकसभा आम चुनाव-2024 के मतों की गणना का मतगणना स्थल राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज माखुपुरा अजमेर निर्धारित किया गया है। अभ्यर्थी, उनके निर्वाचन अभिकर्ता एवं गणन अभिकर्ता राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज के प्रवेश द्वार संख्या 2 (महिला इन्जिनियरिंग कॉलेज के पास) से अनुमत पास द्वारा प्रवेश करेंगे। मतगणना स्थल पर मोबाइल लाना प्रतिबन्धित रहेगा। गणना अभिकर्ता प्रातः 6.30 बजे तक मतगणना स्थल में प्रवेश करेंगे । ईवीएम गणना के लिए 15 मतगणना कक्षों में 110 मतगणना टेबलें लगाई गई है। विधानसभा क्षेत्रा दूदू के लिए 20, किशनगढ़ के लिए 21, पुष्कर के लिए 18, अजमेर उत्तर के लिए 17, अजमेर दक्षिण के लिए 14, नसीराबाद के लिए 17, मसूदा के लिए 21 तथा केकड़ी के लिए 20 राउण्ड निर्धारित किए गए है। अजमेर उत्तर के लिए एक मतगणना कक्ष में 12 मतगणना टेबलें होगी। अन्य विधानसभा क्षेत्रों के लिए 2-2 मतगणना कक्षों में 14-14 मतगणना टेबलें होंगी। रिटर्निंग अधिकारी डॉ. भारती दीक्षित के मुताबिक अजमेर संसदीय क्षेत्रा के लिए 10143 मतदाताओं ने डाक मत पत्र से मतदान किया। इनमें 7310 निर्वाचन ड्यूटी, 2807 होम वोटिंग तथा 26 आवश्यक सेवाओं में नियोजित मतदाता है। साथ ही 3700 ईटीपीबीएस ट्रांसमिट किए गए। इनमें से लगभग 2000 ईटीपीबीएस प्राप्त हुए है इनकी गणना के लिए 26 पोस्टल बैलेट तथा 15 ईटीपीबीएस प्री काउन्टिंग टेबलें लगेंगी।