आगरा के जिलाधिकारी कार्यालय (कलक्ट्रेट) में तैनात पति-पत्नी पर मकान किराया भत्ता (एचआरए) में घोटाले के आरोप हैं। दोनों अलग-अलग एचआरए लेते रहे, जबकि पति-पत्नी दोनों में किसी एक को एचआरए का प्रावधान है। एचआरए वसूली की शिकायत के बाद पत्नी ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली, जबकि पति अभी खेरागढ़ में तैनात है।
कैंट रेलवे स्टेशन रोड निवासी रमाकांत अग्रवाल ने अप्रैल में पति-पत्नी के विरुद्ध डीएम, कमिश्नर से लेकर मुख्य सचिव तक शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि डीपीओ कार्यालय में तैनात रजनी अग्रवाल व कलक्ट्रेट में तैनात कैलाश अग्रवाल दोनों पति-पत्नी हैं। एक ही मकान में रहते हैं। वर्तमान में पति खेरागढ़ में नियुक्त है। नियुक्ति के 30 वर्षों से ही दोनों अवैध रूप से एचआरए का भुगतान लेने के आरोप हैं। जबकि शासनादेश के मुताबिक पति-पत्नी में किसी एक को एचआरए का अधिकार है।
डीएम ने दिए जांच के आदेश
डीएम प्रभु एन ने इस संबंध में एडीएम प्रशासन को जांच के आदेश दिए। एडीएम प्रशासन ने डीपीओ से एचआरए में हुए भुगतान राशि का ब्योरा मांगा, तो उन्होंने जवाब में बताया कि वह पड़ोस में दूसरे मकान में रहती हैं। परंतु एचआरए के रूप में प्राप्त राशि का ब्योरा नहीं दिया। जिस पर एडीएम प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। जिसके बाद कलक्ट्रेट के अधिवक्ता सुनील शर्मा ने कमिश्नर से शिकायत की।
चार महीने से नहीं हो सकी जांच
अपर आयुक्त प्रशासन साहब सिंह ने फिर जांच के आदेश किए, लेकिन चार महीने से जांच नहीं हो सकी है। उधर, शिकायत के बाद महिला कर्मी ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति हों गई। डीपीओ पर भी सरंक्षण देने के आरोप हैं। वहीं, इस संबंध में एडीएम प्रशासन का कहना है कि शिकायत के संबंध में जांच चल रही है। रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।