राजस्थान हाईकोर्ट ने डेढ़ साल बाद शादी को मान्यता दी।
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Ajmer News: प्यार अंधा होता है। वह न तो जाति के बंधन देखता है और न ही धार्मिक अंतर को। अजमेर के एक खादिम की लड़की ने हिंदू लड़के के साथ प्रेम विवाह कर लिया। दोनों को जब जान से मारने की धमकियां मिलने लगी तो उन्होंने पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाई। वहां भी निराशा मिली तो राजस्थान हाईकोर्ट ने इस दंपती को राहत दी है। दोनों के विवाह को मान्यता देकर लड़की के परिवार की ओर से दाखिल हैबियस कॉर्पस याचिका खारिज कर दी है।
याचिकाकर्ता दंपती के वकील अमितोष पारीक ने बताया कि लड़की के पिता अजमेर में खादिम है। परिजनों ने जो एफआईआर दर्ज की थी, दंपती ने उसे खारिज करने की मांग की थी। जस्टिस पंकज भंडारी और समीर जैन ने लड़की के घर वालों की हैबियस कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका को खारिज कर दिया। साथ ही यह भी माना कि दोनों बालिग है। उन्होंने अपनी मर्जी से शादी की है। लड़की को अपना जीवनसाथी चुनने का पूरा हक है। वह अपनी मर्जी से जहां रहना चाहती है, वहां रह सकती है।
पुलिस सुरक्षा में मनचाही जगह भेजने के निर्देश
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने स्वेच्छा से शादी की है। कानूनन उसे रजिस्टर्ड भी कराया है। इस वजह से किसी भी आरोप पर कार्रवाई की दरकार नहीं है। इस आधार पर एफआईआर की कार्यवाही पर रोक लगाई जाए। साथ ही पुलिस को अपनी सुरक्षा में दोनों को उनकी मनचाही जगह पहुंचाने के निर्देश भी दिए।
क्या है मामला?
मामला अजमेर का है। खादिम के परिवार की लड़की ने अपनी मर्जी से शहर के बाहर 19 मार्च 2021 को रजिस्टर्ड मैरिज किया था। दंपती अजमेर के बाहर ही छिपकर वैवाहिक जीवन जी रहे थे। इस बीच समुदाय विशेष के लोगों ने लड़के के परिजनों को धमकाया। एफआईआर दाखिल करने से लेकर जान से मारने की धमकियां भी दी। जब लड़की के घर वालों को उनकी लोकेशन का पता चला तो उन्होंने दूसरे राज्य में जाकर उन्हें धमकाया। लड़की ने अजमेर कोतवाली थाने को पत्र लिखकर सूचना दी कि उसने राजी-मर्जी से शादी की है। उसे किसी ने बहलाया-फुसलाया नहीं है। जान का खतरा होने की वजह से उन्होंने पुलिस अधीक्षक को भी सुरक्षा देने की दरख्वास्त की। जब कहीं सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट की शरण ली।