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Ajmer: देवनारायण बोर्ड अध्यक्ष ने रखी मंदिर के भवन निर्माण की नींव, बोले- मंदिर आध्यात्मिक विरासत का केंद्र

Sat, 05 Oct 2024 07:07 PM IST
अजमेर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर

सार

Ajmer News: देवनारायण बोर्ड के अध्यक्ष ने शनिवार को मंदिर के भवन निर्माण की नींव रखी। इस दौरान उन्होंने कहा कि भगवान विष्णु के 6वें अवतार के रूप में लोक कल्याण हेतु अवतरित भगवान देवनारायण का यह स्थान केवल एक मंदिर ना होकर हमारे सांस्कृतिक, आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र होगा।
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देवरान बोर्ड अध्यक्ष ओमप्रकाश भडाणा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देवनारायण सेवा समिति माखुपुरा की ओर से भगवान देवनारायण मंदिर के 223 वर्ष पुराने प्राचीन मंदिर के भव्य भवन निर्माण हेतु आयोजित भूमि पूजन के समारोह में देवनारायण बोर्ड अध्यक्ष एवं प्रदेश महामंत्री भाजपा ओमप्रकाश भडाना ने मंत्रोचार के साथ ईंट पूजन कर भवन की नींव रखी।
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इस अवसर पर देवनारायण बोर्ड अध्यक्ष एवं प्रदेश महामंत्री भाजपा ओमप्रकाश भड़ाना ने कहा कि भगवान विष्णु के 6वें अवतार के रूप में लोक कल्याण हेतु अवतरित भगवान देवनारायण का यह स्थान केवल एक मंदिर ना होकर हमारे सांस्कृतिक, आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र होगा। इस मंदिर में मत्था टेकने पर ना केवल शांति बल्कि सद्भाव का संचार होगा। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार कंस का अंत करने के लिए भगवान श्री कृष्णा अवतरित हुए, इस प्रकार तत्कालीन कंस रूपी राणा के संहार के लिए भगवान देवनारायण प्रकट हुए।

भड़ाना ने कहा कि यह मंदिर केवल एक समाज का न होकर सभी सनातनियों की आस्था और समरसता का केंद्र बने। इसके लिए आवश्यक है कि इस इस मंदिर निर्माण हेतु सभी जाति बिरादरी से ऊपर उठकर प्रत्येक हिन्दू परिवार से न केवल श्रद्धा अनुसार सहयोग लिया जाए, बल्कि गठित होने वाली समिति में भी सभी जातियों का प्रतिनिधित्व हो। जातियों के अनुसार मंदिर निर्माण हिंदू धर्म को विभाजित करने की कुरीति है। उन्होंने आग्रह किया कि इस मंदिर के माध्यम से हम ग्रामवासी एकजुट होकर उन मूल्यों को पुन स्थापित करें जो हमें एक स्वस्थ, शिक्षित और समृद्ध समाज की दिशा में बढ़ाने में मदद करें।
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समारोह की अध्यक्ष एवं अजमेर दक्षिण की विधायक अनीता भदेल ने कहा कि भगवान देवनारायण जी किसी कि कोख से नहीं बल्कि पहाड़ों पर कमल के पुष्प से उत्पन्न हुए हैं। अतः भगवान देवनारायण को जाति विशेष में बांटना उचित नहीं है, वे लोक देवता नहीं अपितु देवता है, भदेल ने आशा प्रकट की की ये मंदिर सनातन संस्कृति के संरक्षण का केंद्र बने, यहां गुरुकुल परंपरा अनुसार आध्यात्मिक ज्ञान का प्रसार हो, सामाजिक कुरीतियों का उन्मूलन कर सामाजिक उत्थान का केंद्र बने। 
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