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Ajmer: राशन विक्रेताओं की हड़ताल का मामला, खाद्य विभाग की उदासीनता से विक्रेता और उपभोक्ता परेशान

Sat, 03 Aug 2024 06:01 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर

सार

Ajmer: राशन विक्रेताओं की हड़ताल को लेकर खाद्य विभाग की उदासीनता से विक्रेता और उपभोक्ता खासा परेशान हैं। पिछले लंबे समय से प्रदेश भर के राशन विक्रेता मिनिमम इनकम गारंटी योजना के तहत निश्चित मासिक मानदेय सहित कई मुद्दों पर खाद्य विभाग सहित मुख्यमंत्री को ज्ञापन दे चुके, लेकिन सिर्फ आश्वासन मिलता है।
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राशन विक्रेताओं की हड़ताल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रदेशभर के लगभग 27000 राशन डीलर्स गत 1 अगस्त से अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं, जिसका खामियाजा उपभोक्ताओं को उठाना पड़ रहा है और राज्य सरकार का खाद्य विभाग तमाशबीन बनाकर नजारे देख रहा है, लेकिन राशन विक्रेताओं की वर्षों से चली आ रही लंबित मांगों को मानने को तैयार नहीं। जिसके कारण एक तरफ तो उपभोक्ता राशन सामग्री प्राप्त करने से वंचित हो रहा है, वहीं राशन विक्रेता भी अपनी मांगें पूरी नहीं होने के कारण हड़ताल करने पर विवश हो रहे हैं।

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गौरतलब है कि पिछले लंबे समय से प्रदेश भर के राशन विक्रेता मिनिमम इनकम गारंटी योजना के तहत निश्चित मासिक मानदेय सहित कई मुद्दों पर खाद्य विभाग सहित मुख्यमंत्री को ज्ञापन दे चुके, लेकिन हर बार केवल आश्वासन पर राशन विक्रेता पुनः राशन वितरण करने को राजी हो जाते थे, लेकिन किसी भी दल की सरकार द्वारा राशन विक्रेताओं की मांगे पूरी नहीं की गई।

राशन विक्रेताओं की सबसे बड़ी मजबूरी ये भी है कि राज्य सरकार के निर्देश पर खाद्य विभाग उनसे कई कार्य नि:शुल्क करवाता है, जिसके लिए उपभोक्ता को ई:मित्र पर शुल्क देना पड़ता, लेकिन खाद्य विभाग आदेश जारी करके राशन विक्रेताओं से इस तरह के कार्य भी नि:शुल्क करवाता और दबाव बना कर समय सीमा भी निर्धारित की जाती है। जिसके कारण राशन डीलर को वे कार्य भी मजबूरी में करने पड़ते हैं।
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राशन विक्रेताओं की दूसरी सबसे बड़ी समस्या यह भी है कि उन्हें सरकारी योजनाओं के तहत उपभोक्ताओं को सामग्री वितरण करने का कमीशन भी समय पर नहीं मिलता, जिसके कारण कई डीलर्स की आर्थिक स्थिति बहुत दयनीय होने लगी है, लेकिन राज्य सरकार राशन विक्रेताओं से बिना मजदूरी वाला हम्माल समझ कर कार्य करवाती है। जिसके कारण राशन विक्रेताओं में रोष भी व्याप्त है। अब राज्य सरकार के निर्देश पर खाद्य विभाग ने उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए ग्रामीण स्तर पर जीएसएस के माध्यम से राशन सामग्री वितरण की व्यवस्था प्रारंभ करवा दी है, परंतु राशन विक्रेताओं को किसी भी प्रकार की राहत देने और उनकी मांगे मानने के लिए तैयार नहीं हैं। इसका क्या तात्पर्य निकाला जाए?

क्या राज्य सरकार राशन विक्रेताओं का हित नहीं चाहती और उन्हें भूखे मरने को छोड़ रही है, क्योंकि खाद्य विभाग के पास राशन सामग्री वितरण के विकल्प उपलब्ध है। जानकारी के अनुसार जिस प्रकार ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए जीएसएस से वितरण व्यवस्था की जा रही है, उसी प्रकार शहरी क्षेत्रों में भी क्रय विक्रय सहकारी समितियों से वितरण की व्यवस्था करवाए जाने पर मंथन चल रहा है और यदि ऐसा होता है तो संभवत: राशन विक्रेताओं की मांगे पूरी नहीं की जाएंगी और खाद्य विभाग तथा राज्य सरकार उनकी मांगों को अनदेखा कर देगा।

देखा जाए तो राज्य सरकार राशन विक्रेताओं से गुलामों की भांति काम करवा रही है, जिन्हें किसी भी प्रकार का मेहनताना नहीं देना और योजनाओं के नाम पर कार्य करवाना ही उद्देश्य है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कोई भी जनप्रतिनिधि या विधायक या सांसद या मंत्री इन राशन विक्रेताओं के हक में आवाज नहीं उठा रहा, जिसके कारण कई डीलर्स दयनीय आर्थिक स्थिति के कारण खून के आंसू रोने को मजबूर हैं और मजबूरी के कारण कार्य भी नहीं छोड़ रहे।

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