प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर पूरे देश में चल रहे सेवा पखवाड़े के तहत बुधवार रात को अजमेर स्थित विश्व प्रसिद्ध ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह में बड़ी देग पकाई गई। इस विशेष अवसर पर राज्यसभा सांसद और चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के संस्थापक चांसलर सतनाम सिंह संधू भी मौजूद रहे। उन्होंने स्वयं अपने हाथों से आग जलाकर देग पकाने की शुरुआत की और उसमें खाद्य सामग्री डाली।
मीडिया से बातचीत में सांसद संधू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी “सबका साथ, सबका विकास” की सोच के साथ देश को निरंतर आगे ले जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सेवा पखवाड़े के अंतर्गत दरगाह में दूसरी बार बड़ी देग पकाई गई है, जो सेवा और समर्पण का प्रतीक है। संधू ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत सेवा, त्याग और भाईचारे की भावना के साथ नई ऊँचाइयों को छू रहा है।
दरगाह के गद्दीनशीन और चिश्ती फाउंडेशन के चेयरमैन हाजी सलमान चिश्ती ने बताया कि यह देग पूरी तरह शुद्ध शाकाहारी रखी गई है। इसमें तैयार किए गए लंगर को दरगाह में आने वाले जायरीनों के साथ-साथ आसपास के गांवों और ज़रूरतमंद लोगों तक पहुँचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि गरीब नवाज की दरगाह से हमेशा सेवा और भाईचारे का संदेश जाता है और यह आयोजन उसी परंपरा को और मजबूत करता है।
दरगाह के गद्दीनशीन सैयद अफसान चिश्ती ने कहा कि यह पहला अवसर है जब किसी देश के प्रधानमंत्री के लिए दरगाह में विशेष रूप से बड़ी देग पकाई गई। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष भी प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिवस पर देग पकाई गई थी, लेकिन इस बार का आयोजन और भी विशेष रहा। अफसान चिश्ती ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया के इकलौते नेता हैं जो सभी धर्मों का सम्मान करते हुए सबको साथ लेकर चलते हैं। इस मौके पर उन्होंने प्रधानमंत्री की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और देश में शांति व भाईचारे की दुआ मांगी।
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इस अवसर ने दरगाह परिसर में एकता, सेवा और भाईचारे का अद्भुत संदेश दिया। देग में तैयार किया गया प्रसाद श्रद्धालुओं के बीच बांटा गया, जिससे सभी ने सामूहिक सद्भाव और सेवा की अनुभूति की। इसके पूर्व सांसद सतनाम सिंह संधू ने गरीब नवाज की दरगाह में अकीदत के फूल और मखमली चादर पेश कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और देश में अमन-चैन की दुआ मांगी। दरगाह अजमेर शरीफ में आयोजित यह कार्यक्रम सेवा पखवाड़े के अंतर्गत धार्मिक आस्था, सामाजिक सेवा और राष्ट्रीय एकता का मिश्रित रूप रहा, जिसने सभी को आपसी भाईचारे और मानव सेवा का संदेश दिया।