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Ajmer News: दुर्गाशंकर के लीवर और किडनी से 3 लोगों को मिला जीवनदान, परिजनों ने ब्रेनडेड किशोर के अंग डोनेट किए

Mon, 22 Sep 2025 05:09 PM IST
अजमेर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर

सार

अचानक ब्रेन डेड होने के बाद अजमेर के जेएलएन अस्पताल में भर्ती दुर्गाशंकर के लीवर और किडनियों ने तीन अन्य मरीजों को नया जीवन दिया।
 
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दुर्गाशंकर ने अंगदान से दिया जीवन का अमूल्य उपहार
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विस्तार
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अजमेर के जेएलएन अस्पताल में भर्ती 16 वर्षीय दुर्गाशंकर गुर्जर ने अंगदान के माध्यम से मानवता को एक अद्वितीय संदेश दिया। 9वीं कक्षा में पढ़ रहे युवक दुर्गा का आकस्मिक ब्रेन डेड होने के बाद उनके परिवार ने साहसिक निर्णय लेते हुए उनके अंग दान किए। दुर्गा के लीवर और दोनों किडनियां जयपुर के एसएमएस अस्पताल भेजी गईं, जिससे तीन मरीजों को नया जीवन मिला।
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परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार 16 सितंबर को सिर में तेज दर्द की शिकायत के बाद दुर्गा अचानक बेहोश हो गया, जिसके बाद उसे अजमेर के जेएलएन अस्पताल लाया गया, जहां चार दिन इलाज के बाद 21 सितंबर को डॉक्टरों ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. अनिल सामरिया के अनुसार दिमाग की नस फटने से यह स्थिति बनी, जबकि शरीर के अन्य अंग सामान्य रूप से कार्य कर रहे थे।

इस आकस्मिक घटना के बाद दुर्गा के पिता जवानराम गुर्जर ने बताया कि 20 सितंबर को ही परिवार ने अंगदान का निर्णय लिया, जिसके बाद जयपुर और चेन्नई से डॉक्टरों की टीमें अजमेर पहुंचीं। हालांकि हार्ट ट्रांसफर संभव नहीं हो पाया लेकिन दुर्गा का लीवर और दोनों किडनियां सफलतापूर्वक जयपुर भेजी गईं। अंगों के समय पर पहुंचने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। इस प्रक्रिया से तीन मरीजों को नया जीवन मिला।
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दुर्गा के परिजनों के इस साहसी निर्णय पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने अस्पताल पहुंचकर परिवार को माला पहनाकर सम्मान किया। श्रद्धांजलि सभा में दुर्गा शंकर अमर रहे के नारे लगाए गए और परिवार को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया

मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. अनिल सामरिया ने बताया कि अंगदान की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन सिस्टम से जुड़ी हुई है। जैसे ही परिवार ने सहमति दी, लीवर, किडनी, हार्ट और लंग्स के लिए डिमांड दर्ज की गई और जांच के बाद लीवर और किडनियां जयपुर ट्रांसफर की गईं।
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दुर्गा की कम उम्र में हुई मृत्यु ने परिवार को गहरे दुःख में डाला, लेकिन उनके साहसिक निर्णय ने तीन अन्य परिवारों को उम्मीद और नई जिंदगी दी। यह पहल पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा है और आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देती है कि मृत्यु अंत नहीं, बल्कि किसी और की जिंदगी की नई शुरुआत हो सकती है।

 

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