अजमेर के एएसपी व एसपी को बंदी पहुंचाने का काम करने वाले आठ थानेदारों को पुलिस महकमे से निलंबित कर दिया। इनके खिलाफ अभियोजन स्वीकृति जारी करने के बाद पुलिस मुख्यालय ने ये आदेश जारी किया।
निलंबन के साथ ही सभी का जिला मुख्यालय भी बदला गया है। मामले के तहत एसीबी ने पिछले साल जनवरी में दलाल रामदेव से बंधी के 2 लाख से अधिक रुपए लेते अजमेर के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक राजेश मीणा को गिरफ्तार किया था। इस प्रकरण में लिप्त पाए जाने पर तत्कालीन एएसपी लोकेश सोनवाल को भी गिरफ्तार किया गया था।
वर्तमान में ये दोनों जमानत मिलने के बाद रिहा हो चुके हैं। निलम्बित सभी थानेदार उस समय अजमेर जिले में ही लगे हुए थे। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने इस मामले निलम्बित हुए आठ थानाधिकारियों के खिलाफ चालान पेश करने की तैयारी में है।
चालान पेश करने से पहले एसीबी इन्हें गिरफ्तार भी कर सकती है। तत्कालीन एसपी मीणा व एएसपी सोनवाल समेत दो सब इंस्पेक्टरों के खिलाफ चालान पेश किया जा चुका है।
जांच में सामने आया है कि एएसपी सोनवाल एसपी राजेश मीणा के लिए दलाल रामदेव ठठेरा से बंधी एकत्रित करवाता था। जोधपुर निवासी रामदेव हर महीने एक से पांच तारीख के बीच अजमेर आकर बंधी एकत्रित करता था।
वह सोनवाल के सरकारी आवास पर ठहरता था और सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल भी करता था।
एसीबी जांच में सामने आया था कि थाना प्रभारी जमीन विवाद एवं प्रॉपर्टी खरीद फरोख्त के मामलों में जमकर भ्रष्टाचार करते थे। दलाल ठठेरा एसपी से हरी झंडी दिलवाता था। एसीबी चार्जशीट में थानाधिकारियों के खेल का खुलासा करेगी।