दीवार पर लिखा मकान गोशाला को दान करना।
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जोधपुर के डांगियावास थाने के बावरला गांव में एक 70 साल के बुजुर्ग ने अपनी की हत्या कर दी। हत्या बाद बुजुर्ग ने भी फांसी लगाकर जान दे दी। बुजुर्ग दीपाराम दमामी डाक विभाग के पूर्व कर्मचारी थे। दस साल पहले वे पोस्टमैन पद से रिटायर्ड हुए थे। उनकी पत्नी सुकमा देवी 65 साल की थी। दंपति के कोई संतान नहीं थी, वे दोनों अकेले की घर में रहते थे।
शनिवार रात को बुजुर्ग दीपराम ने पत्थर से सिर कुचलकर पत्नी सुकमा की हत्या कर दी। इसके बाद खुद भी फंखे से लटकर फांसी लगा ली। खुदकुशी से पहले दीपाराम ने कमरे की दीवार पर लिखा- यह मकान कोई भी बेचता या खरीदता है तो उसका सत्यानाश हो जाएगा। यह सिर्फ और सिर्फ गोशाला ही रखे। (मकान गोशाला के लिए है)
डांगियावास थाना पुलिस ने बताया कि दीपाराम और सुकमा देवी भांवरला गांव में रहते थे। शनिवार को पड़ोसी की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों के शवों को मथुरा दास माथुर अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवाया।
पुलिस ने बताया कि दीपाराम गायों की सेवा करते रहते थे। गोशाला के लिए दान भी दिया करते थे। कई बार उन्होंने पड़ोसियों से गोशाला खोलने की बात कही थी, हालांकि वे ऐसा नहीं कर पाए। अपने उस सपने को पूरा करने के लिए सुसाइड से पहले उन्होंने दीवार पर मकान और अपनी संपत्ति गोशाला के लिए दान करने की बात लिखी है।
जानकारी के अनुसार दीपाराम ने आत्महत्या से पहले अपने पड़ोसी को फोन कर पुलिस बुलाने की बात कही थी। कुछ देर बाद वह घर पहुंचा तो दीपाराम ने दरवाजा नहीं खोला और कुछ देर बाद आने की बात कही। इसके कुछ देर बाद पड़ोसी वापस पहुंचा तो किसी ने दरवाजा नहीं खोला। उन्होंने खिड़की से झांककर देखा तो दीपाराम फंदे पर लटक रहे थे।
दीपाराम की पत्नी कई साल पहले एक हादसे का शिकार हो गई थीं। जिसके बाद से बिस्तर पर थीं। दीपाराम ही उनकी देख-रेख किया करते थे। पड़ोसी भी खाना देकर उनका सहयोग किया करते थे। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि बुढ़ापे और अकेलेपन से तंग आकर दीपाराम ने पहले पत्नी की हत्या फिर खुद भी फांसी लगाकर जान दे दी।