समुंद्र सिंह चौधरी को जम्मू से जयपुर की ट्रेन पकड़े हुए छह घंटे बीते थे जब बीएसएफ के एक अधिकारी ने उन्हें उनके 34 वर्षीय बेटे जितेंद्र की मौत की खबर सुनाई। जितेंद्र बीएसएफ में एसिसटेंट कमांडेंट के पद पर तैनाथ थे। जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले में बुधवार को पाकिस्तान ने संघर्ष विराम का उल्लंघन करते हुए अंधाधुंध गोलीबारी की जिसमें जितेंद्र सिंह समेत चार बीएसएफ कर्मी शहीद हो गए।
इस खबर को सुनने के बाद कई बार बेहोश हो चुकी अपनी पत्नी के विलाप और ट्रेन की थकान के बीच समुंद्र सिंह ने कहा, "महज छह घंटे पहले जम्मू रेलवे स्टेशन पर उसने मुझे गले लगाया था। मैं ट्रेन में ही सवार था जब मुझे उसके मौत की सूचना मिली।
जयपुर के रजत पथ इलाके में उनके घर में सुबह से ही आनेवालों का तांता लगा हुआ है। इनमें दूर की कॉलोनियों से आए वे लोग भी शामिल हैं जो जितेंद्र या उनके परिवार को इससे पहले नहीं जानते थे। व्हाट्सएप समूहों और स्थानीय न्यूज चैनल से उन्हें जितेंद्र के शहादत के बारे में जानकारी मिली।
समुंद्र सिंह ने दुख की इस घड़ी में भी शांत थे और किसी तरह अपने आंसुओं को टपकने से रोकने की कोशिश करते हुए कह रहे थे कि दुख की इस घड़ी में भी उन्हें बहुत गर्व है। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान के खिलाफ सख्त और दृढ़ कार्रवाई करने का समय आ गया है।"
जितेंद्र के परिवार में उनके मां-पति, उनकी पत्नी रेणु और तीन वर्षीय बेटा यश बचे हैं। उन्होंने कहा, "मेरे बेटे ने मुझे कुछ दिन पहले ही फोन किया और जोर देकर कहा था कि डिप्टी कमांडेंट के पद पर पदोन्नत होने और स्थानांतरित होने से पहले ही मैं उससे जम्मू में मिल लूं।"
भरतपुर जिले में रहनेवाला यह परिवार एक दशक पहले ही जयपुर में बस गया था और 2011 में जितेंद्र बीएसएफ में शामिल हुए थे। जितेंद्र एक मेधावी छात्र थे और कई वाद-विवाद और प्रतियोगिताएं जीती थी, लेकिन सशस्त्र बलों के प्रति यह उनका आकर्षण ही था जिसने हमेशा उनके करियर के चुनाव में अहम भूमिका निभाई।