आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा सरकारी कार्यालय में चल रहे भ्रष्टाचार पर सर्जिकल स्ट्राइक चल रही है। खासकर आरटीए व एमवीआई कार्यालय टारगेट पर हैं, लेकिन पंजाब में एक बड़ा गोरखधंधा चल रहा है, वह है दिल्ली से गाड़ियों को खरीदकर पंजाब का नंबर लगाकर बेचने का। इसमें तमाम अधिकारियों के अलावा दलाल व कार डीलर वारे न्यारे कर रहे हैं।
1- दिल्ली से वाहन काफी सस्ते मिलते हैं, जिन पर डीएच नंबर होता है। ज्यादातर ट्रक, इनोवा, छोटे हाथी, फार्च्यूनर वाहन होते हैं। इन वाहनों को सस्ते भाव से खरीदा जाता है और आरटीए कार्यालय में आवेदन कर पंजाब का नंबर लगवाया जाता है।
2- दिल्ली परिवहन विभाग की एनओसी के साथ सेल फार्म लगते हैं, जिसकी फाइल तैयार कर आवेदक पंजाब का नंबर लगाने की गुजारिश करता है।
3- फाइल आरटीए विभाग के उस क्लर्क के पास जाती है, जो विभाग के उच्चाधिकारी का खासमखास होता है। वह फाइल को क्लीयर कर एसओ यानी एकाउंटेंट के पास भेजता है।
हर माह करीब सात हजार वाहन पंजाब में बिक्री के लिए दिल्ली से आते हैं, जिसको जिला स्तर पर आरटीए कार्यालय में पंजाब नंबर के लिए पंजीकृत करने के लिए भेजा जाता है।
एसएसपी विजिलेंस दलजिंदर सिंह ढिल्लों का कहना है कि विजिलेंस ब्यूरो भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए जमीनी स्तर पर कार्य कर रही है। पंजाब सरकार की तरफ से सरकारी कार्यालयों में करप्शन को खत्म करने के लिए हर संभव यत्न किए जा रहे हैं। आरटीए व एमवीआई कार्यालय पर विजिलेंस की पैनी नजर है।
मालवा के एक जिले में धड़ाधड़ दिल्ली नंबर के वाहन पंजाब नंबर के लिए रजिस्टर्ड किए गए। इसकी अंदरखाते जांच भी शुरू हो चुकी है कि मालवा के एक खास जिले को माफिया ने क्यों चुना?