अब डॉक्टरों के पास कैंसर से लड़ने के लिए एक अचूक हथियार आ गया है, जिससे यह गंभीर बीमारी अब लोगों को ज्यादा नहीं डरा सकेगी। अल्फा किरणों की मदद से कैंसर को जड़ से मिटाना संभव हो सकेगा।
इसके लिए पीजीआई चंडीगढ़ में ‘अल्फा ट्रीटमेंट सेंटर’ खोला जाएगा और इस तकनीक से न तो मरीज को कीमोथेरेपी की जरूरत पड़ेगी और न ही रेडिएशन थेरेपी की। सिर्फ एक बार अल्फा ट्रीटमेंट देकर कैंसर को जड़ से खत्म कर दिया जाएगा। कम खर्च में इस प्रक्रिया से उपचार की सुविधा देने वाला पीजीआई देश का पहला चिकित्सा संस्थान होगा।
पीजीआई में शुरू हुई न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग की इंटरनेशनल कांग्रेस की आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर बलजिंदर सिंह ने बताया कि इस वक्त पूरी दुनिया में कैंसर का सबसे बेहतरीन और सौ फीसदी सफल इलाज अल्फा ट्रीटमेंट ही है।
अमेरिका की जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी, अल्बर्ट आइंस्टीन यूनिवर्सिटी और कोलंबिया यूनिवर्सिटी के अलावा जर्मनी के म्यूनिख में अल्फा ट्रीटमेंट से स्किन, ब्लड और ब्रेन कैंसर का इलाज हो रहा है। भारत दुनिया का तीसरा देश होगा, जहां इस तकनीक से सभी तरह के कैंसर का इलाज होगा।
ऐसे होगा इलाज
इस प्रक्रिया के तहत विशेष प्रकार के रेडियो आइसोटोप विकसित किए जाते हैं, जो अल्फा किरणों के माध्यम से शरीर में प्रवेश कराए जाते हैं। प्रो. बलजिंदर कहते हैं कि ये किरणें शरीर में प्रवेश करने के बाद कैंसर कोशिकाओं को खत्म कर देती है। मौजूदा इलाज की प्रक्रिया में साइड इफेक्ट्स के साथ दोबारा कैंसर पनपने की आशंका भी रहती है जबकि नई प्रक्रिया से ऐसा कुछ भी नहीं होगा।
एक लाख रुपये से कम में इलाज
अल्फा थेरेपी से पीजीआई में एक लाख रुपये से कम कीमत में इलाज किया जाएगा जबकि विदेशों में इस तकनीक से इलाज कराने पर 25 से 30 लाख रुपये खर्च आता है।
-28 लाख कैंसर के मरीज वर्ष 2012 तक भारत में।
-5.55 लाख मौतें पिछले साल कैंसर के कारण।
-10 लाख लोग कैंसर की चपेट में आते हैं प्रति वर्ष।
-30 फीसदी मौतों का कारण तंबाकू खाने से होने वाला कैंसर।
-50 फीसदी कैंसर के मामलों में वक्त रहते इलाज संभव।
-70 फीसदी मरीजों को वक्त रहते इलाज नहीं मिल पाता।
-1200 कैंसर विशेषज्ञ देश में।
-60 फीसदी पीड़ित सामान्य चिकित्सकों पर हैं निर्भर।
-100 से ज्यादा तरह के होते हैं कैंसर।
-34 तरह के कैंसर का वक्त रहते इलाज संभव।
(स्रोत: मार्च 2012 में राज्यसभा में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री द्वारा दी गई जानकारी)
(इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च रिपोर्ट-2012)