सोमवार को पेशी के दौरान एसआईटी ने सभी का 7 दिन का पुलिस रिमांड दिए जाने की मांग रखी, जिस पर दोनों पक्षों के वकीलों की बहस के बाद अदालत ने सभी को 21 मई तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया। मामले में बचाव पक्ष के वकील विनोद कुमार मोंगा ने दावा किया कि पंजाब पुलिस के पास बेअदबी मामले में नामजद डेरा सच्चा सौदा सिरसा के श्रद्धालुओं के खिलाफ कोई सबूत नहीं है।
पिछले साल इन सभी को पावन स्वरूप चोरी करने के घटना में गिरफ्तार किया था और आरोपपत्र भी दाखिल किया था लेकिन सभी को अदालत से जमानत मिल गई थी और पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय ने 4 जनवरी 2021 को अपने फैसले में जांच रिपोर्ट को नकारते हुए नए सिरे से जांच के आदेश दिए थे।
सीबीआई को सौंपी गई थी जांच
मालूम हो कि बरगाड़ी बेअदबी से संबंधित तीनों घटनाओं की जांच तत्कालीन अकाली-भाजपा सरकार ने सीबीआई को सौंप दी थी, जिसने लंबी पड़ताल के बाद क्लोजर रिपोर्ट पेश की थी। क्लोजर रिपोर्ट पर बवाल होने पर सीबीआई ने दोबारा जांच शुरू की लेकिन डीआईजी रणबीर सिंह खटड़ा की अगुवाई वाली एसआईटी ने पिछले साल पावन स्वरूप चोरी करने के आरोप में डेरा श्रद्धालुओं को गिरफ्तार कर लिया।
एसआईटी की समांतर जांच किए जाने पर पैदा हुए कानूनी विवाद के बाद उच्च न्यायालय ने 4 जनवरी 2021 को यह केस पंजाब पुलिस को सौंप दिया था और एसआईटी प्रमुख रणबीर सिंह खटड़ा को बदलने के भी निर्देश दिए थे। इसके बाद सरकार ने आईजी बॉर्डर रेंज सुरिंदरपाल सिंह परमार को एसआईटी प्रमुख बनाया जिनकी अगुवाई में दोबारा जांच शुरू की गई है।