पंजाब में जिला उपायुक्तों द्वारा रेडक्रास फंड के दुरुपयोग के मामले में राज्य सरकार ने कथित दोषी आठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।
सरकार द्वारा छह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जा चुकी है जबकि एक अधिकारी को नोटिस दिया गया है।
उसका जवाब आना बाकी है। एक अन्य अफसर को भविष्य में सावधान रहने की चेतावनी दी गई है। यह जानकारी मंगलवार को सरकार के परसोनल विभाग के अवर सचिव मोहिंदर सिंह पाराशर ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस अरुण पल्ली की डिवीजन बेंच को दी।
हाईकोर्ट ने कार्रवाई रिपोर्ट दो अगस्त तक कोर्ट में दाखिल करने की हिदायत जारी करते मामले का निपटारा कर दिया है।
जिन अधिकारियों पर कार्रवाई की जा रही है, उनमें हरकेश सिंह (सेवानिवृत्त आईएएस), एसआर लद्धड़, अंजलि भावरा, विकास गर्ग, केएस सिद्धू और जेआर कुंडल शामिल हैं जबकि के. शिव प्रसाद को नोटिस जारी किया गया है। अन्य अधिकारी कुमार राहुल को भविष्य में सावधान रहने की चेतावनी दी गई है।
रिसर्जेंस इंडिया नामक एनजीओ ने जनहित याचिका दायर कर रेडक्रास फंड में घपले का आरोप लगाया था।
याचिका में कहा गया था कि जिला उपायुक्त इस फंड का इस्तेमाल अपनी निजी सहूलियतों के लिए कर रहे हैं।
हाईकोर्ट ने दो सेवानिवृत्त जजों एएल बाहरी और एके नेहरू की दो सदस्यीय कमेटी जांच के लिए गठित की थी।
कमेटी ने रिपोर्ट में कहा था कि फंड का गठन जिस उदेश्य के लिए हुआ है, उस उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं हो रहा।
पंजाब में लुधियाना और हरियाणा में पानीपत के जिला उपायुक्तों द्वारा सबसे अधिक घपले की बात रिपोर्ट में कही गई थी।
कमेटी ने कार्रवाई की सिफारिश करने के साथ ही अदालत से यह भी सिफारिश की थी कि फंड के इस्तेमाल करने की जिला उपायुक्तों की शक्तियों पर अंकुश लगना चाहिए।
पंजाब इस मामले में आठ अधिकारियों द्वारा फंड के दुरुपयोग की बात मान चुका है जबकि हरियाणा और चंडीगढ़ ने कहा था कि कोई अधिकारी फंड घपले में शामिल नहीं है और अधिकारियों को सावधानी बरतने की चेतावनी दे दी गई है।