कांग्रेस कार्यसमिति की नई दिल्ली में सोमवार को हुई बैठक शांतिपूर्वक निपटने के बाद भी यही कयास लगाए जा रहे थे कि पंजाब प्रदेश कांग्रेस में अंतर्कलह तेज हो जाएगी।
कैप्टन अमरिंदर सिंह गुट ने एक बार फिर प्रदेश कांग्रेस प्रधान प्रताप सिंह बाजवा पर जमकर हमला बोला।
इस बार 24 विधायकों समेत पार्टी के कई बड़े नेताओं ने बाजवा से हार की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने को कहा है।
बाजवा विरोधी मुहिम की कमान विधायक और उपप्रधान केवल ढिल्लों के हाथ में है।
इस मुहिम में कैप्टन गुट के अहम लोग तो हैं ही, वे नेता भी हैं जो पिछले समय के दौरान बाजवा के साथ नजर आते थे।
इनमें जोगिंदर सिंह पंजगराईं, भारत भूषण आशू, जगबीर बराड़, गुरजीत औजला जैसे लोग भी शामिल हैं।
वहीं, कुछ नेता अभी खुल कर सामने नहीं आए हैं, वे सही वक्त का इंतजार कर रहे हैं। ढिल्लों ने कहा कि सूबे में पार्टी की हार के बाद बाजवा समर्थक जो दलील दे रहे हैं, क्या पार्टी के जीतने पर भी यही कहते।
कैप्टन गुट के नेताओं ने कहा कि बाजवा को हार की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। सोनिया गांधी और राहुल गांधी की तरह उन्हें भी इस्तीफा देना चाहिए।
जैसे कि 2012 में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दिया था। इन नेताओं ने कहा कि कांग्रेस का वोट प्रतिशत 2012 की तुलना में 41 से घट कर 32 प्रतिशत रह गया है।
46 के बजाय सिर्फ 29 विधानसभा हलकों में लीड है। पिछले लोक सभा चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें जीतने वाली कांग्रेस अब आप से भी पिछड़ कर तीसरे स्थान पर रह गई है।
उन्होंने सवाल किया कि बाजवा अपनी पत्नी चरनजीत कौर के हलके कादियां में भी हार गए।
वह भावी सीएम के नाम पर वोट मांग रहे थे और गुरदासपुर के सभी नौ हलकों में लोगों ने इसे नकार दिया।
आम आदमी पार्टी का पूरे देश में सफाया हो गया। पर बाजवा के खराब नेतृत्व की बदौलत कांग्रेस यहां एंटी-इनकम्बेंसी फैक्टर को वोट में नहीं बदल सकी और आप जीत गई।