पाकिस्तान ने भले ही गलत पहचान देकर सरबजीत सिंह को मौत की सजा दी।
लाहौर की जेल में कायरों की तरह कैदियों से उसकी हत्या करवा दी गई मगर अंतत: पाकिस्तान ने आधिकारिक रूप से यह स्वीकार कर लिया कि वह सरबजीत था।
पाकिस्तान सरकार की ओर से शव के साथ जो डैथ सर्टिफिकेट नंबर 20126 भेजा गया उसमें उसका नाम सरबजीत सिंह उर्फ मंजीत सिंह पुत्र मक्खन सिंह लिखा गया है।
पाकिस्तान की कोट लखपत जेल में साथी कैदियों की ओर से किये गए जनलेवा हमले का शिकार हुए भारतीय कैदी सर्बजीत सिंह को मौत की बाद पाकिस्तानी सरकार ने भी स्वीकार कर लिया है कि वह मंजीत नहीं बल्कि सर्बजीत सिंह ही है।
इस बात की पुष्टि पाकिस्तान सरकार की ओर से उसके शव के ताबूत के साथ भेजे डैथ सर्टिफिकेट से हुर्ह है। हालांकि सरबजीत सिंह पर जब बम धमाकों का मुकदमा दर्ज किया गया था तब उसका नाम मंजीत सिंह पुत्र महिंगा सिह दर्ज किया गया था।