इस दौरान सभी प्रकार का खर्च पंजाब सरकार वहन करेगी। राज्य सरकार ने दिसंबर और जनवरी का गेहूं तुरंत भेजने के लिए केंद्र को पत्र लिखा है।
इसके बाद लाभार्थियों को पूरे साल का गेहूं एक ही बार दिया जाएगा।
आटा-दाल योजना के तहत पंजाब के करीब 30 लाख परिवारों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
अब तक 15 लाख परिवारों को आटा-दाल दी जा रही है। राज्य के करीब 26 हजार डिपो होल्डरों ने हड़ताल कर रखी है और वे गेहूं के आवंटन के बदले कमीशन या वेतन की मांग कर रहे हैं।
इस समस्या को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने अलग रास्ता तलाश लिया है। सरकार ने गांवों तक स्थानीय मंडियों से ही गेहूं पहुंचाने की जिम्मेवारी खुद ही उठाने का फैसला किया है।
इसके बाद जनवरी से अप्रैल तक का गेहूं एक ही बार दिया जाएगा। मई महीने से राज्य सरकार ने पूरे साल का गेहूं एक ही बार हर गांव में पहुंचाने का फैसला किया है।
ऐसा करने से केंद्र सरकार का मंडियों से स्टोरों तक और फिर लोगों तक गेहूं पहुंचाने का करोड़ों रुपये बच जाएगा।
अब तक डिपो होल्डर ही स्टोरों से गेहूं उठाते और उनकी ट्रांसपोर्टेशन का खर्च देते थे। राज्य में लगभग एक करोड़ 41 लाख लोगों को गेहूं देना है।
इस तरह पूरे साल का 84,60000 क्विंटल गेहूं की हर साल जरूरत होगी। राज्य के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार पूरी प्रक्रिया में केंद्र को करीब दो सौ करोड़ रुपये फायदा हो सकता है।
खत्म होगी हेराफेरी
डिपो होल्डरों के कमीशन का मामला केंद्र सरकार द्वारा गठित कमेटी हल करेगी। कोई फैसला न होने के कारण हड़ताल जारी है। सीधे गेहूं देने के कारण रास्ते में होनेवाली हेराफेरी की गुंजायश खत्म हो जाएगी।