पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान की ओर से भ्रष्टाचार से जंग के लिए जारी की गई हेल्पलाइन से जनता का मोहभंग हो रहा है। आंकड़े तो यही बयां कर रहे हैं। औसतन एक माह में एक लाख शिकायतों की संख्या से शुरू हुई हेल्पलाइन अब 6 हजार तक सिमट गई है। हालांकि सरकार का दावा है कि हेल्पलाइन से भ्रष्टाचार कम हुआ है, इसलिए शिकायतें भी कम आ रही हैं।
23 मार्च को शहीद ए आजम भगत सिंह के शहीदी दिवस पर भगवंत मान ने घोषणा की थी कि अगर कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी या फिर नेता रिश्वत मांगे तो 9501 200 200 पर व्हाट्सएप कर देना। इसके बाद सरकार उसके खिलाफ कार्रवाई करेगी। सीएम मान ने घोषणा के बाद शिकायतों की झड़ी लग गई। 23 मार्च से लेकर 30 अप्रैल तक 2 लाख 16 हजार 342 शिकायतें दर्ज हो गईं। मई में शिकायतों की संख्या अप्रैल के मुकाबले 50 फीसदी रह गई। अब हालात यह हैं कि प्रति माह छह हजार के करीब शिकायतें आ रही हैं। असल में सीएम की हेल्पलाइन पर करीब साढ़े तीन लाख शिकायतें आईं, जिनमें से 187 मामले ही दर्ज हुए हैं। मामले दर्ज न होने से शिकायतकर्ता भी मायूस हैं। यही वजह है कि शिकायतें घट रही हैं।
सीएम हेल्पलाइन का खौफ ही काफी है, बड़े मगरमच्छ भी जेल में: थियाड़ा
आप की स्टेट सचिव राजविंद कौर थियाड़ा का कहना है कि सीएम भगवंत मान की सरकार का एजेंडा ही भ्रष्टाचार के खिलाफ है। यही वजह है कि इस हेल्पलाइन का खौफ है। सरकारी कार्यालयों से जमीनी स्तर पर रिश्वतखोरी पर अंकुश लगा है। बड़े मगरमच्छ भी इसी सरकार ने अंदर किए हैं चाहे वह भारत भूषण आशू हों या फिर साधू सिंह। शिकायतों का कम होने का एक कारण यह भी है कि अब कोई सरकारी मुलाजिम रिश्वत मांगने से घबराने लगा है।
शिकायत पहुंचते ही केस दर्ज, आरोपी गिरफ्तार
सुरिंदर कुमार पुत्र दीवान चंद निवासी उग्गी ने 23 मार्च को ही अपनी शिकायत भेजी थी। महिला मीनू ने उसकी बेटी को पुलिस में नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये लिये थे, जिसकी आडियो रिकार्डिंग भी व्हाट्स एप पर भेजी थी, जिसके बाद केस दर्ज हुआ और आरोपी महिला गिरफ्तार भी हो गई।
मैंने पुलिस वाले के खिलाफ की थी शिकायत, नहीं हुई कार्रवाई
राजविंदर सिंह पुत्र तरण सिंह निवासी होशियारपुर ने तीन माह पहले शिकायत दी थी कि एक लड़ाई झगड़े के केस में पुलिस मुलाजिम उससे पैसों की मांग कर रहा है। इसकी आडियो रिकार्डिंग भी भेजी थी। वह पैसे खुलेआम तो नहीं मांग रहा था लेकिन अलग अलग स्थानों पर मिलने के लिए बुला रहा था। कोई भी इस बात को समझ सकता है कि वह थाने के बाहर क्यों बुला रहा था। इस शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
पटवारी ने सात लाख लिए, शिकायत दी, कार्रवाई नहीं हुई
मेहरदीप सिंह पुत्र बलविंदर सिंह निवासी सुभानपुर कपूरथला का कहना है कि पटवारी ने उससे सात लाख रुपये इंतकाल के नाम पर लिए थे। शिकायत किए एक माह का समय बीत गया है। बाकायदा 16 मिनट की रिकार्डिंग भी है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
कार्रवाई तो हुई लेकिन बड़े मगरमच्छ काबू नहीं
शाहकोट के मॉडल टाउन निवासी मनोज अरोड़ा पुत्र अशोक कुमार का कहना है कि उसने तीन माह पहले शिकायत दी थी। भ्रष्टाचार के दस्तावेजी सबूत भी थे। विजिलेंस ने जांच के बाद स्थानीय पुलिस को कार्रवाई के लिए लिख दिया। दो छोटी मछलियों के खिलाफ कार्रवाई हो गई लेकिन हाथ बड़े मगरमच्छों तक नहीं पहुंचे।
हेल्पलाइन पर आईं शिकायतें
23 से 31 मार्च 1,19,359
अप्रैल 96,983
मई 43,562
जून 27,536
जुलाई 24315
अगस्त 22506
सितंबर में अब तक 4298