करीब बीस हजार रुपये प्रति किलो की चंदन की लकड़ी के अलावा अन्य कीमती लकड़ी की खेती की तरफ पंजाब ने रुख किया है।
सूबे का वन विभाग राज्य के विभिन्न इलाकों में चंदन के अलावा सांगवान एवं विलो लकड़ी की खेती के लिए ट्रायल कर रहा है, यदि यह ट्रायल कामयाब रहे तो पंजाब भी इन लकड़ियों की पैदावार करने वाले राज्यों की कतार में शामिल हो जाएगा।
चंदन की लकड़ी के पौधे खास तौर से बैंगलूरू से मंगवा कर लुधियाना के मत्तेवाड़ा, दसूहा एवं रोपड़ के इलाके में लगाए गए हैं। इनकी देखभाल और ग्रोथ का हिसाब किताब भी बैंगलूरू के माहिरों की टीम ही कर रही है। जिला वन अधिकारी दलजीत सिंह बराड़ का दावा है कि फिलहाल इन लकड़ियों के पौधों की ग्रोथ तसल्लीबख्श है।
चंदन की लकड़ी की पैदावार दक्षिण भारत के तमिलनाडु एवं कर्नाटक इत्यादि राज्यों में की जा रही है। इन लकड़ी का दवा, फर्नीचर और कई चीजों में इस्तेमाल किया जाता है।
पौधों की देखभाल के लिए विशेष प्रबंध
बराड़ के अनुसार चंदन की लकड़ी के पौधों की संभाल के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। रात के वक्त वहां पर गार्ड की तैनाती रहती है। इसके अलावा कंटीली तारें भी लगाई गईं हैं, ताकि जानवर छोटे-छोटे पौधों को खराब न कर पाएं। हाल ही में बैंगलूरू के माहिरों की टीम ने यहां पर दौरा करके इन पौधों की ग्रोथ का जायजा लिया है और अपनी संतुष्टि जताई है।
सांगवान की खेती पर भी फोकस
जिला वन अधिकारी का कहना है कि विलो लकड़ी का ट्रायल मुक्तसर, दसूहा एवं लुधियाना में किया जा रहा है। इसमें तीनों जगह पर इस लकड़ी के 22-22 क्लोन लगाए गए हैं। एक क्लोन में तीन पौधे लगाए गए हैं। इसके अलावा सांगवान की खेती पर भी फोकस किया जा रहा है। बराड़ का दावा है कि इन तीनों तरह की लकड़ी के लिए पंजाब की जमीन काफी बेहतर है।