इन तमाम नेताओं के मुख्यमंत्री की रेस में नाम होने के साथ-साथ पंजाब प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू का भी नाम बतौर मुख्यमंत्री चर्चा में है। हालांकि सूत्रों का कहना है 2022 में होने वाला विधानसभा का चुनाव नवजोत सिंह सिद्धू को बतौर मुख्यमंत्री का चेहरा रखकर लड़ने की तैयारी की जा रही है। पंजाब सरकार ने कभी मंत्री रही एक वरिष्ठ महिला नेता का कहना है ऐसे में एक संभावना यह भी बन रही है कि नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब का मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है।
पंजाब में अचानक राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। दोपहर को दो बजे पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की अपने विधायकों की बुलाई गई बैठक को रद्द कर दिया गया है। माना यह जा रहा है कि सत्ता परिवर्तन के चलते ही विधायकों ने कैप्टन अमरिंदर की बुलाई गई बैठक में आने से मना कर दिया था। सूत्रों का कहना है कि पंजाब प्रभारी हरीश रावत और सोनिया गांधी की भी मुलाकात के दौरान सब कुछ पहले से तय हो चुका है। शाम को विधायक दल की होने वाली बैठक महज खानापूर्ति की है। इस बैठक में कैप्टन अमरिंदर सिंह का इस्तीफा ले लिया जाएगा।
पंजाब कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दोपहर को दो बजे बुलाई गई अपनी बैठक में विधायकों का न पहुंचने के बाद तय किया है अगर पार्टी उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाती है तो वह कांग्रेस का दामन छोड़ सकते हैं। पंजाब की राजनीति पर करीब से नजर रखने वाले जेएस गिल कहते हैं हालांकि कैप्टन के पास दूसरी पार्टी में जाने के कोई बहुत विकल्प नहीं बचते हैं। क्योंकि भारतीय जनता पार्टी में कैप्टन का राजनीतिक भविष्य किसी भी तरीके का नहीं दिख रहा है। बतौर मुख्यमंत्री कैंडिडेट अब वह भाजपा में फिट नहीं हो पाएंगे क्योंकि उनकी उम्र 75 साल से ज्यादा हो चुकी है। इसके अलावा अकाली दल में जाने का कोई मतलब नहीं बनता और आम आदमी पार्टी में भी बहुत गुंजाइश नहीं दिख रही है। गिल का कहना है ऐसे में अगर सम्मानजनक विदाई नहीं होती है तो कैप्टन नाराजगी में अपना कोई राजनैतिक संगठन जरूर बना सकते हैं। हालांकि इसके लिए अभी अमरिंदर और उनके समर्थक न तैयार हैं न ही कोई योजना है।