पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उनकी समूची कैबिनेट सहित सभी मुख्य संसदीय सचिवों को मार्च का वेतन नहीं मिला है।
ऐसा वित्तीय संकट की वजह से नहीं बल्कि लेखा विभाग का कामकाज ऑनलाइन किए जाने में हो रही देरी के चलते हुआ है। वेतन के अलावा मंत्रियों और मुख्य संसदीय सचिवों के टूर बिल भी रुके पड़े हैं।
उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने सरकारी विभागों का कामकाज ऑनलाइन करके पेपरलेस करने की योजना पर तेजी से काम करने के निर्देश दिए थे। लेकिन सचिवालय स्थित विभागों को ऑनलाइन करने का कामकाज देख रही कंपनी समयबद्ध तरीके से इसे सफलतापूर्वक अंजाम नहीं दे पा रही है।
मुख्यमंत्री सहित कैबिनेट और सीपीएस के वेतन बिल के लिए डीडी पावर पहले प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री के पास थी, अब यह अंडर सेक्रेटरी अकाउंट के पास आ गई है।
ऑनलाइन सिस्टम में अभी तक वेतन बिल और टूर बिल का सॉफ्टवेयर तैयार नहीं हुआ है इस वजह से माननीयों को मार्च का वेतन नहीं मिल सका है।
मुख्यमंत्री को प्रति माह 90 हजार जबकि उप मुख्यमंत्री सहित कैबिनेट मंत्रियों को 70 हजार और मुख्य संसदीय सचिवों को 60 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता है। इसके अलावा मंत्रियों और मुख्य संसदीय सचिवों के टूर बिल भी रुके पड़े हैं क्योंकि टूर बिल प्रोफार्मा ऑनलाइन नहीं हो सका है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए आला अधिकारी इस मुद्दे पर बोलने को तैयार नहीं हैं लेकिन इतना जरूर कह रहे हैं कि अगर सिस्टम ऑनलाइन नहीं हुआ तो पहले की तरह मैनुअल बिल पास कर वेतन जारी कर दिया जाएगा।
मई का वेतन ऑनलाइन सिस्टम से ही मिलेगा और तब तक इसे विकसित कर लिया जाएगा।
मुलाजिमों को भी देरी से मिला वेतन
नए वित्तीय वर्ष में विभिन्न विभागों को बजट आवंटन में होने वाली देरी के चलते सरकारी मुलाजिमों को मार्च का वेतन भुगतान 10 अप्रैल के बाद हुआ। जिन विभागों को आवंटन समय पर हुए उससे जुड़े विभागों को भुगतान हो गया है जबकि अब भी कुछ ऐसे विभाग हैं जहां 19 अप्रैल को बजट आवंटन होने के बाद वेतन मिला है।