कांग्रेस की अंतर्कलह से उम्मीद
आम आदमी पार्टी इस विधानसभा चुनाव में पंजाब में अपने लिए बेहतर संभावना देख रही है। पिछली बार भी वह सत्ता की प्रबल दावेदार थी, लेकिन पार्टी के ही कुछ नेताओं के असंतुष्ट हो जाने और कांग्रेस के एक सीमा से आगे जाकर लोगों के लिए वादे करने से आम आदमी पार्टी की संभावनाएं खत्म हो गईं। लेकिन पार्टी मान रही है कि इस बार स्थिति उसके अनुकूल है।
एक तरफ तो उसके आंतरिक संगठन में पूरे नेता एकजुट हैं और सभी अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में भरोसा रखते हुए पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर रहे हैं तो दूसरी ओर सत्ता की दूसरी प्रमुख दावेदार कांग्रेस अपनी अंतर्कलह से जूझ रही है। माना जा रहा है कि चुनाव के समय भी कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू गुट एक-दूसरे के विरोध में काम करना जारी रह सकते हैं। ऐसे में कांग्रेस की आपसी फूट का लाभ आम आदमी पार्टी को मिल सकता है।
अपनी योजनाओं का भी मिलेगा लाभ
आम आदमी पार्टी पंजाब में अपनी जीत के लिए केवल कांग्रेस की फूट या अकाली दल के भ्रष्टाचार के आरोप पर निर्भर नहीं कर रही है, उसने पंजाब को जीतने के लिए अपने स्तर पर रणनीति बना रखी है। उसका मानना है कि अरविंद केजरीवाल द्वारा पंजाब में 300 यूनिट बिजली मुफ्त देने और किसानों के कर्ज माफ करने की घोषणा बेहद कारगर साबित हो सकती है। पार्टी अपने तरकश से और चुनावी तीर निकालकर पंजाब में अपनी जीत सुनिश्चित करने की कोशिश करेगी और अरविंद केजरीवाल की दो दिवसीय यात्रा इसी रणनीति का परिणाम है।