पूर्व मुख्यमंत्री शहीद बेअंत सिंह ने पीजीआईजी और एम्स की तर्ज पर पंजाब में जो मेडिकल कॉलेज व अस्पताल बनाने का सपना देखा था, वह राजनीति की भेंट चढ़ गया।
अब हालात यह बन चुके हैं कि वहां पर कभी सफाई कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलता तो कभी चिकित्सकों को। पिम्स को राजनीतिज्ञों ने अपना ऐसा अखाड़ा बनाया कि वहां पर शिक्षा ग्रहण कर रहे 300 विद्यार्थियों के भविष्य पर भी प्रश्न चिन्ह लग गया है।
बेअंत सिंह के कार्यकाल में पिम्स के स्थान पर गन्ना फार्म होता था। शहीद बेअंत सिंह जालंधर विधानसभा से ही निर्वाचित हुए थे और उनका एक सपना था कि जालंधर में ही एक ऐसा इंस्टीट्यूट बने, जो विश्व विख्यात हो। एम्स या पीजीआई की तर्ज पर एक बड़ा अस्पताल तैयार किया जाए ताकि लोग इलाज के लिए चंडीगढ़ व दिल्ली की तरफ न भागे।
उन्होंने गन्ना फार्म की 56 एकड़ जमीन एक्वायर कर इस पर मेडिकल कॉलेज तैयार करने का नींव पत्थर रखा। बेअंत सिंह के कत्ल के बाद इस प्रोजेक्ट को ग्रहण लग गया। 1997 में पंजाब में सत्ता बदल गई और शिअद-भाजपा गठबंधन की सरकार बनी। पिम्स पर 131 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जानी थी।
पिम्स का कामकाज और निर्माण काफी धीमा हो गया। 2002 में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सत्ता संभाली तो दोबारा पिम्स का निर्माण की तरफ ध्यान दिया गया। विश्व विख्यात कंपनी लारसन एंड टरबो ने इस प्रोजेक्ट को कैप्टन अमरिंदर सिंह के कार्यकाल में पूरा किया।
पिम्स को रिलायंस या किसी बड़े ग्रुप को देने की बात चलती रही लेकिन 2007 में कैप्टन की सत्ता चली गई। शिअद-भाजपा गठबंधन ने पंजाब में कुर्सी संभाली तो पिम्स की 56 एकड़ जमीन का भाव आसमान छू चुका था। सिर्फ जमीन का भाव 2500 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका था।
शिअद ने इस प्रोजेक्ट को अपने ही मंत्री सुरजीत सिंह रखड़ा व उनकी टीम को सौंप दिया। सुरजीत सिंह रखड़ा के साथ बीबी जागीर कौर के निकटवर्ती और शिअद नेता परमजीत सिंह रायपुर के भाई व भतीजों ने भी इस प्रोजेक्ट में हिस्सेदारी डाल ली। इसके अलावा साऊथ के चिकित्सकों का एक ग्रुप भी मिल गया और अक्तूबर 2009 में पिम्स सोसाइटी को यह प्रोजेक्ट सौंप दिया गया।
पिछले कई दिनों से पिम्स में क्लासें नहीं लग रही हैं। 300 स्टूडेंट्स एमबीबीएस कर रहे हैं। लेक्चरर को वेतन नहीं मिल रहा है। इंडोर खाली हो चुका है और लेक्चरर व प्रोफेसर हड़ताल पर हैं। हालात यह है कि कभी शिअद के विधायक परगट सिंह आकर पिम्स में आश्वासन देते हैं तो कभी शिअद प्रधान गुरचरण सिंह चन्नी।
अगले ही दिन कांग्रेसी नेता सुखपाल खैहरा, केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री संतोष चौधरी, पीपीसीसी प्रधान प्रताप बाजवा पहुंच जाते हैं। वह निकलते हैं तो सीएम प्रकाश सिंह बादल अपने पास मामले को ले आते हैं। पिम्स में कांग्रेसी धरना दे रहे हैं और संकट गहराता जा रहा है।