पटियाला। भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) से पंजाब की नुमाइंदगी खत्म करने के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा ने संघर्ष का बिगुल फूंक दिया है। भारतीय किसान यूनियन एकता (डकौंदा) के प्रदेश प्रधान बूटा सिंह बुर्जगिल, महासचिव जगमोहन सिंह ने कहा कि केंद्र का यह फैसला प्रदेश के हकों पर डाका है। केंद्र सरकार की इस नई साजिश का मुंह तोड़ जवाब दिया जाएगा। सात मार्च को जिला व तहसील स्तरों पर केंद्र के खिलाफ रोष प्रदर्शन करने का एलान किया गया।
किसान नेताओं ने आगे कहा कि पंजाब विधानसभा चुनावों को हुए अभी हफ्ता भी नहीं हुआ कि प्रदेश के हकों पर केंद्र के डाके फिर शुरू हो गए हैं। इस बार हमला पंजाब के पानी पर हुआ है। केंद्र की ओर से भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट रूल्स 1974 में बदलाव करके बीबीएमबी में से पंजाब की स्थायी सदस्यता समाप्त कर दी गई है। इस तरह पंजाब को पानी के प्रबंध से बाहर निकालकर केंद्र की झाक प्रदेश के पानी छीनने पर है। जबकि पंजाब को पहले ही पानी पूरा नहीं मिल रहा है। पंजाब के बनते कुल पानी का चौथा हिस्सा ही मिलता है। इसलिए अब किसान जत्थेबंदियों का कर्तव्य बनता है कि केंद्र के इस कदम के खिलाफ संयुक्त संघर्ष छेड़ा जाए। आगे कहा कि पहले केंद्र ने तीन खेती कानून लाकर राज्यों के संघीय ढांचे पर हमला बोला था।
किसान नेताओं ने आगे कहा कि एक तरफ पंजाब की धरती बंजर हो रही है। पंजाब के बड़े हिस्से में पानी का स्तर खतरनाक हद तक नीचे चला गया है। पंजाब के 117 ब्लाकों में से 109 ब्लाक डार्क जोन बन गए हैं। दूसरी तरफ पंजाब के पानी को राजस्थान व दिल्ली को मुफ्त में लुटाया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि दरियाई पानी में से पंजाब का हिस्सा बढ़ाकर इस संकट का पक्का हल किया जाए।