नसराली गांव से गुजरते फाटक नंबर 152-ए पर करोड़ों रुपये की लागत से बना रेलवे अंडर ब्रिज लोगों के लिए दिक्कत बन गया है।
बरसाती दिनों में यहां पानी भर जाता है और कई दिन तक जमा रहता है। यहां से करीब 20 गांवों के लोगों का आना जाना है और स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को पानी से गुजरकर जाना पड़ता है।
वहीं पानी निकासी की व्यवस्था करवाने के बजाय नगर काउंसिल के कार्यकारी अधिकारी जगजीत सिंह जज ने पुल के बाहर चेतावनी बोर्ड लगवा दिया है। बोर्ड पर लिखा गया है कि इस अंडरब्रिज की बजाय कोई और रास्ता चुन लें क्योंकि अंदर पानी जमा है। इस मामले को लेकर भारतीय किसान यूनियन पंजाब के उपाध्यक्ष राजिंदर सिंह बेनीपाल ने इलाके के करीब 24 गांवों के पंचों, सरपंचों और आम लोगों के दस्तखत उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल, मानवाधिकार कमीशन चंडीगढ़, मंत्री अनिल जोशी, डायरेक्टर स्थानीय सरकार विभाग चंडीगढ़, डिप्टी डायरेक्टर लुधियाना और डीसी फतेहगढ़ साहिब को भेजकर रेलवे अंडर ब्रिज की समस्याओं को हल करने की गुहार लगाई है।
वहीं काउंसिल के कार्यकारी अधिकारी जगजीत सिंह जज ने कहा कि इस बोर्ड का मकसद केवल राहगीरों को सचेत करना है ताकि कोई व्यक्ति चोटिल न हो। पुल में पानी की निकासी के लिए लगाई मोटर के बारे में वह कोई ठोस जवाब नहीं दे सके।
रेलवे अंडरब्रिज की खामियों से दुखी राजिंदर सिंह बेनीपाल 27 मई 2015 को नगर काउंसिल के गेट पर मरणव्रत पर बैठ गए थे। इसके बाद हरकत में आए काउंसिल अधिकारियों ने अंडरब्रिज की समस्याओं को दूर करने के लिखित आश्वासन देकर बेनीपाल का मरणव्रत तुड़वा दिया था। एक साल का समय बीतने के बाद भी रेलवे अंडर ब्रिज की समस्याएं जस की तस हैं। किसान नेता ने इस मामले को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जाने का दावा भी किया है।