राजपुरा। दोनों परिवारों को नहीं पता था कि पटाखे बनाकर चंद रुपये कमाने के चक्कर में अपने बच्चों को सदा के लिए खो देंगे, क्योंकि जिन बच्चों के अच्छे भविष्य की कामना दिन रात करते थे, उन्हीं दो परिवारों के तीनों बच्चे मनप्रीत, गुरप्रीत और पल्लवी पटाखे बनाने वाले मैटीरियल में हुए धमाके से हमेशा-हमेशा के लिए दूर चले गए। जिसके चलते दोनों परिवारों का रो रोकर बुरा हाल है।
बताया जाता है कि बार-बार होने वाले धमाकों में कई लोगों की सांसें थम चुकी हैं, लेकिन इसके बाद भी पटाखे बनाने का धंधा नहीं थमा, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पाबंदी के बाद भी शहर में गैरकानूनी तौर पर पटाखे बनाने का धंधा कैसे और किसकी शह पर चल रहा है? जबकि पुलिस की ओर से बरामद पोटाश, सल्फर व अन्य ज्वलंत सामान, जिसे जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा गया था, उसकी भी अभी तक रिपोर्ट नहीं आई है और न ही इस हादसे से जुड़े किसी भी व्यक्ति को पुलिस पकड़ पाई है। इस ब्लास्ट में मरने वाले तीनों बच्चे गरीब और जरूरतमंद थे। जिनकी मौत से दो परिवार पूरी तरह तबाह होकर रह गए हैं।
धमाका कितना जोरदार था इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पूरा मकान मलबे में बदल गया, पारिवारिक सदस्यों का कहना है कि पटाखे बनाने काम करीब दो-तीन महीने पहले शुरू किया था, जबकि पटाखे बनाने का सामान मिर्च मंडी से आता था। मुरादाबाद से राजपुरा आकर आतिशबाजी का सामान तैयार करवाने वाले पिता-पुत्र का नाम भी बताया गया है, लेकिन पुलिस लिखित तौर पर शिकायत न होने की बात कह रही है और मुख्य आरोपी किशन कुमार के पकड़े जाने के बाद ही गुत्थी सुलझने की बात कही जा रही है।
बताया जाता है कि मिर्च मंडी में पटाखे के कुछ बड़े सौदागर बिना किसी डर के गैरकानूनी तौर पर पटाखे बनाने अथवा बनवाने के धंधे को अंजाम देते हैं, कहते हैं इनकी वजह से कुछ लोगों की सांसें सदा के लिए थम गईं, लेकिन इनका गैरकानूनी धंधा नहीं थमा। पुलिस प्रशासन ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाता है या दावों पर कितना खरा उतरता है, इसका पता आने वाले समय में लग पाएगा।
क्या कहते हैं चौकी इंचार्ज
इस संबंध में फोन से संपर्क करने पर कस्तूरबा पुलिस चौकी के इंचार्ज गुरनाम सिंह ने बताया कि पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और मुख्य आरोपी किशन कुमार की तलाश की जा रही है। उसके पकड़े जाने के बाद ही गुत्थी सुलझ सकती है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने कई घरों में दबिश के बाद पटाखे, गंधक, पोटाश व अन्य सामान बरामद किया था, जिसे जांच के लिए फॉरेंसिक लैब में भेजा गया था। उसकी रिपोर्ट अभी नहीं आई। हादसे की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस द्वारा तैयार की गई टीमें लगातार अपने मिशन में लगी हैं।