आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले महान शूरवीर सरदार ऊधम सिंह के जन्मदिवस को सरकार ने पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया।
इस साल तो 31 जुलाई को शहीद ऊधम सिंह के बलिदान दिवस पर पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम के निधन के कारण राज्यस्तरीय श्रद्धांजलि समागम भी आयोजित नहीं हो सका था। सादे समागम में मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने शिरकत जरूर की थी, लेकिन उस समय सीएम ने इलाके में शहीद के नाम पर किसी तरह की ग्रांट देने का ऐलान नहीं किया था।
ऐसे में लोगों को आशा थी कि मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, इस महान शहीद के जन्मदिवस पर शामिल होकर इलाके के विकास के लिए बड़ी घोषणाएं करेंगे, लेकिन शनिवार को लोगों की तमाम उम्मीदें धूमिल हो गईं और नगरी के लोग निराश हैं।
सीएम बादल ने शहीद की याद में बड़ा म्यूजियम बनाने की घोषणा तीन साल पहले की थी। अब तक इस म्यूजियम की आधारशिला तक नहीं रखी जा सकी है। बादल ने शहीद ऊधम सिंह का जन्म व बलिदान दिवस राष्ट्रीय स्तर पर मनाने का आह्वान किया था लेकिन वे खुद शहीद को भूल गए हैं।
विरोधी दल कांग्रेस के ब्लाक अध्यक्ष संजय गोयल, वामदल के नेता कामरेड हरदेव सिंह बख्शीवाला ने कहा कि शहीदों के नाम पर अकाली दल हमेशा राजनीति कर रहा है। शहीद ऊधम सिंह इलाके को संवारने के लिए पिछले दल साल से कोई ठोस काम नहीं हुआ है। सरकार तो अपने वादे भी पूरे नहीं कर सकी है।