सुनाम की अनाज मंडी में लाल मिर्च के लगे ढेर।
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लाल मिर्च की कम पैदावार ने किसानों के हौसले पस्त कर दिए हैं। मौसम के साथ नहीं देने और बीमारी के चपेट में आने की वजह से पिछले साल के मुकाबले इस बार लाल मिर्च का झाड़ करीब 30 फीसदी कम हुआ है। पिछले साल के मुकाबले दाम में डेढ़ गुना वृद्धि होने से किसानों को थोड़ी राहत जरूर नसीब हुई है। मिर्च की फसल बीमारी की भेंट चढ़ते देख किसान दोबारा धान बीज रहे हैं।
क्षेत्र के किसानों ने लाल मिर्च की किस्म सीएच 01, वीरजी व पेपसी की बिजाई की है। सबसे ज्यादा सीएच 01 को तरजीह दी गई और इसी वैराइटी को बीमारी लग गई। किसान मंगा सिंह तथा शीशपाल ने बताया कि उन्होंने एक-एक एकड़ में लाल मिर्च की बिजाई की। फल नहीं लगने के कारण लाल मिर्च की फसल को हटाकर फिर से धान की बिजाई की है। खेती माहिर सोहन सिंह ने कहा कि फंगस लगने के कारण किसानों को नुकसान हुआ है। इस बार किसानों ने लाल मिर्च की बिजाई बडे़ पैमाने पर की थी। कम झाड़ ने किसानों की कमर तोड़ दी है। किसान दो गुना खर्च करके धान की बिजाई करने के लिए मजबूर हुए हैं।
मार्केट कमेटी सुनाम के आंकड़ों के मुताबिक पिछले वर्ष 22 अगस्त तक मंडी में 3980 क्विंटल मिर्च की आवक हुई थी। इस बार 22 अगस्त तक 3309 क्विंटल मिर्च आई है। पिछले वर्ष औसतन 1400 रुपये प्रति क्विंटल बिकने वाली मिर्च इस बार 2100 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है। मार्केट कमेटी के चेयरमैन रघुवीर सिंह ने कहा कि मिर्च के कम झाड़ ने किसानों को मायूस किया है। दाम बढ़ने से कमेटी की आय में बढ़ोत्तरी जरूर हुई है। भारतीय किसान यूनियन एकता उग्राहां के जिला सचिव दरबारा सिंह ने मिर्च के बीज की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मांग की कि मिर्च के बीज की जांच की जाए और प्रभावित किसानों को इसकी भरपाई की जाए।