पंजाब में बारिश के चलते गुरुवार को बिजली की मांग में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। पहले जहां उमस भरी तेज गर्मी व धान सीजन के कारण प्रदेश में बिजली की मांग 14200 मेगावाट तक पहुंच गई थी, वहीं गुरुवार को मांग 8085 मेगावाट तक लुढ़क गई, जिससे पावरकॉम को राहत मिली है।
कोयला बचाने के लिए पावरकॉम ने तुरंत रोपड़ व लहरा मुहब्बत थर्मल प्लांटों की सभी आठ यूनिटों को बंद कर दिया। उधर, प्राइवेट थर्मलों को भी आधी क्षमता पर चलाया गया। पावरकॉम के अधिकारियों का कहना है कि हालांकि धान सीजन के लिए 15000 मेगावाट तक बिजली का प्रबंध कर लिया है। लेकिन अगर इस बार मानसून उम्मीद के मुताबिक रहा, तो फिर बिजली की कोई किल्लत नहीं होगी।
पंजाब में पिछले दो दिनों से मानसून पूरी तरह से सक्रिय है। विभिन्न जिलों में तेज बारिश हो रही है, जिससे पारा गिरने से बिजली की मांग लुढ़क गई है। जबकि इससे पहले पंजाब में बिजली की मांग 14200 मेगावाट का आंकड़ा छू गई थी। जिसे देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा था कि इस बार धान सीजन में बिजली की मांग16000 मेगावाट तक पहुंच जाएगी। ऐसे में पावरकॉम की ओर से किए प्रबंधों के बावजूद बिजली की किल्लत रहने से लोगों को कटों का सामना करना पड़ेगा। लेकिन पंजाब भर में झमाझम बारिश से पावरकॉम ने राहत की सांस ली है।
गुरुवार को पंजाब में बिजली की अधिकतम मांग 8085 मेगावाट रही, जो पहले के 14200 मेगावाट के मुकाबले 5620 मेगावाट कम रही। इसे देखते हुए पावरकाम ने अपने दोनों थर्मल प्लांटों रोपड़ व लहरा की आठ यूनिटों को बंद कर दिया है। उधर निजी में राजपुरा, तलवंडी साबो व गोइंदवाल थर्मलों को आधी क्षमता पर चलाया गया। पावरकॉम को निजी थर्मलों से 1644 मेगावाट, हाइडल प्रोजेक्टों से 255 व अन्य स्रोतों को मिलाकर कुल 2172 मेगावाट बिजली की उपलब्धता हुई। ऐसे में बिजली की मांग को पूरा करने के लिए पावरकॉम ने बाहर से 5821 मेगावाट बिजली ली।
पावरकॉम को पंजाब भर से मिलीं 64075 शिकायतें
बारिश के चलते बिजली सप्लाई बाधित होने के कारण पावरकॉम को गुरुवार को प्रदेश भर से 64075 शिकायतें मिलीं, जिनमें से लगभग 31724 शिकायतों का निपटारा हो गया था। दिन के समय 44 फीडरों के डाउन होने से बिजली सप्लाई प्रभावित हुई।