पंजाब में बिजली संकट गहरा गया है। शुक्रवार मध्यरात्रि के बाद गोइंदवाल साहिब थर्मल प्लांट के दोनों यूनिट तकनीकी खराबी के चलते बंद पड़ गए। इससे पंजाब को होने वाली बिजली सप्लाई के रुकने से धान के मौजूदा सीजन और भीषण गर्मी में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करना पावरकॉम के लिए मुश्किल हो जाएगा। जबकि तलवंडी साबो थर्मल प्लांट का एक यूनिट पहले ही बंद पड़ा है।
पंजाब में पैडी सीजन व भीषण गर्मी के चलते इन दिनों बिजली की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। 24 जून को पंजाब में बिजली की मांग 13405 मेगावाट पहुंच गई थी, जो इस सीजन में अब तक की सबसे ज्यादा मांग रही। वहीं शनिवार को बिजली की मांग 12500 मेगावाट दर्ज की गई। इस मांग को पूरा करने के लिए पावरकॉम को शनिवार को बाहर से 7285 मेगावाट तक बिजली लेनी पड़ी, जबकि पंजाब के लिए तय सीमा 7300 मेगावाट है।
पावरकॉम भले ही कितने दावे करे, लेकिन बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करना मुश्किल हो रहा है। इसी का नतीजा है कि आठ घंटे के दावे के बाद भी कई जगह किसानों को दिन में मुश्किल से तीन से चार घंटे बिजली मिल पा रही है। ऐसे समय में पावरकॉम के लिए अब एक नई समस्या खड़ी हो गई है। शुक्रवार मध्यरात्रि 12 बजे के बाद गोइंदवाल साहिब थर्मल प्लांट के 270-270 मेगावाट के दोनों यूनिट तकनीकी खराबी के चलते बंद पड़ गए, जिससे पंजाब को इस प्लांट से होने वाली 540 मेगावाट बिजली की सप्लाई बंद पड़ गई। हालांकि कहा जा रहा है कि इंजीनियरिंग स्टाफ की ओर से यूनिटों की मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है।
उधर, तलवंडी साबो थर्मल प्लांट का 660 मेगावाट का एक यूनिट पहले ही बंद पड़ा है। इससे उपभोक्ताओं को कटों का सामना करना पड़ सकता है।
पावरकॉम मैनेजमेंट जहां बिजली सप्लाई में दिक्कत का ठीकरा कारपोरेशन के इंजीनियरिंग स्टाफ पर डाल रहा है, जो अपनी मांगों को लेकर पिछले काफी समय से आंदोलन कर रहे हैं। जबकि वहीं पीएसईबी इंजीनियरिंग एसोसिएशन इसके लिए मैनेजमेंट को जिम्मेदार बता रही है। एसोसिएशन मुताबिक जहां थर्मलों में इंजीनियरिंग व अन्य स्टाफ की कमी है, जिससे यूनिटों को चलाना मुश्किल हो रहा है। वहीं मरम्मत के लिए जरूरी सामान जैसे ट्रांसफार्मरों, खंभों और केबलों की भी पैडी सीजन से पहले खरीद नहीं की गई।