सुनाम में बस में बैठाने से आनाकानी किए जाने पर महिलाओं ने नारेबाजी की।
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पंजाब सरकार ने महिलाओं को खुश करने के लिए मुफ्त बस सफर की सुविधा तो शुरू कर दी, लेकिन इसने पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे पेप्सू रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (पीआरटीसी) की मुसीबतें बढ़ा दीं। इस फैसले से उसने 50 लाख रुपये तक रोजाना का नुकसान आंका था, लेकिन औसतन यह 58 लाख तक पहुंच गया। आने वाले दिनों में इसके रोजाना 65 लाख पार कर जाने की आशंका है। ऐसे पीआरटीसी के लिए अपने मुलाजिमों को सैलरी व पेंशनरों को पेंशन देना भी मुश्किल दिखाई दे रहा है।
सूबा सरकार ने एक अप्रैल से महिलाओं के लिए सरकारी बसों में मुफ्त सफर की सुविधा शुरू की है। बसों में चढ़ने वाली महिला सवारियों के कुछ दिन के आंकडो़ं को औसत मानकर पीआरटीसी ने अनुमान लगाया कि इस फैसले से रोजाना 50 लाख रुपये तक का नुकसान होगा, लेकिन मुफ्त सुविधा के कारण महिला यात्रियों की तादाद बढ़ने लगी तो यह अनुमान धराशाही हो गया और 20 अप्रैल तक ही यह आंकड़ा 58 लाख प्रतिदिन पर पहुंच गया।
अब पीआरटीसी ने इसके महीने के आखिर तक 65 लाख पार कर जाने की आशंका जताई है। यानी कि 20 अप्रैल तक पीआरटीसी को करीब 11 करोड़ 60 लाख का नुकसान हुआ है, जिसके 30 अप्रैल तक 17.40 करोड़ पहुंच जाने का अनुमान है। इस सुविधा के पहले कॉरपोरेशन की बसों से होने वाली दैनिक आय औसतन एक करोड़ 35 लाख रुपये थी, जो घटकर अब 77 लाख रह गई है। इससे पीआरटीसी को अपने खर्चे पूरे करना भी मुश्किल हो गया है।
एडवांस भुगतान के लिए सरकार को लिखा पत्र
पीआरटीसी ने पंजाब सरकार को पत्र लिखकर 58 लाख रुपये रोजाना के नुकसान के हिसाब से 15 अप्रैल तक का भुगतान करने की मांग की है। इसके लिए महीने के आखिर में सिर पर खड़े सैलरी व पेंशन के खर्चे का हवाला दिया गया है। साथ ही भविष्य में मुफ्त बस सफर का भुगतान एडवांस में करने की गुहार लगाई गई है।
कोरोना के चलते बसें वैसे ही 50 फीसदी कैपेसिटी से चलाई जा रही हैं। उनमें भी महिलाओं के मुफ्त सफर ने कॉरपोरेशन को नुकसान पहुंचाया है। सरकार को लिखा है, उम्मीद है जल्द ही पैसा मिल जाएगा। - सुरिंदर सिंह, जीएम (आपरेशन), पीआरटीसी